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नारनौल के किसानों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत:भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजे के निर्देश; 30 लाख प्रति एकड़ को बताया था कम




महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी क्षेत्र में प्रस्तावित 900 एकड़ के लॉजिस्टिक हब से जुड़े भूमि अधिग्रहण और मुआवजा विवाद में किसानों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को किसानों की जमीनों पर यथास्थिति बनाए रखने तथा भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के प्रावधानों के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला गांव बसीरपुर, तलोट और घाटाशेर की भूमि से जुड़ा है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने हाल ही में 15 मई 2026 को जारी पत्र के माध्यम से हरियाणा लैंड कंसोलिडेशन एक्ट-2017 के तहत जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इसके विरोध में 91 किसानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। प्रशांत भूषण ने की थी पैरवी किसानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान किसानों ने दलील दी कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही 24 सितंबर 2024 को अपने फैसले में सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के अनुसार मुआवजा देने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दे चुका है। कम मिला था मुआवजा शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लॉजिस्टिक हब परियोजना के लिए वर्ष 2016-17 में किसानों की जमीनों का मूल्य कथित सहमति मॉडल के तहत करीब 30 लाख रुपए प्रति एकड़ निर्धारित किया गया था, जबकि किसानों का दावा है कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार उन्हें 65 लाख मुआवजे की मांग की थी। तेजपाल यादव ने उठाए थे सवाल सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् इंजीनियर तेजपाल यादव ने दावा किया कि उन्होंने इस मामले में कथित अनियमितताओं और मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया पर कई बार सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश किसानों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



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