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हरियाणा BJP के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की पुस्तक ‘श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति’ का दूसरा संस्करण लॉन्च किया गया। पुस्तक के दूसरे संस्करण के लिए देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना पत्र लिखा है। उन्होंने पुस्तक को जीवन के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि यह रचना केवल वाचन या समझ के लिए नहीं, बल्कि जीवन जीने के लिए है। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि पुस्तक हर व्यक्ति को जीवन में एक मंत्र अपनाने का आग्रह करती है, जो अनजाने में ही उसके जीवन का ध्येय तय कर देता है। ‘जो पढ़ेंगे, चलेंगे वो बढ़ेंगे’ की भावना के साथ लिखी गई यह छोटी-सी पुस्तक सफलता के मंत्रों के साथ परम सत्य के साक्षात्कार के द्वार भी खोलती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से सत्य के दर्शन पाठक को स्वयं करने होंगे। सीएम और विधानसभा अध्यक्ष को भी भेंट की प्रति धनखड़ ने बुधवार सुबह पुस्तक का दूसरा संस्करण मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण को भी भेंट किया। इससे पहले सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम घोष को भी पुस्तक की प्रति समर्पित की गई थी। ‘नई पीढ़ी को तरक्की का रास्ता दिखा सकती है पुस्तक’ धनखड़ के अनुसार पुस्तक का उद्देश्य केवल पाठक को जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे अपने कर्म, संगति और विचारों पर विचार करने के लिए प्रेरित करना है। पुस्तक में जीवन के छोटे-छोटे निर्णयों से लेकर स्वधर्म, राष्ट्रहित और परमार्थ तक की अवधारणाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया है। यही वजह है कि यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए विचार और तरक्की का मार्ग प्रशस्त करने वाली रचना बन सकती है।
अंग्रेजी अनुवाद से गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों तक पहुंचेगी पुस्तक धनखड़ की पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भी किया गया है। इससे पुस्तक का दायरा गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों तक बढ़ेगा। पुस्तक में जीवन, कर्म, संगति और विचारों के प्रभाव को उदाहरणों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है। रामायण और महाभारत की दो विचार यात्राओं का उदाहरण पुस्तक में संगति के प्रभाव को समझाने के लिए धार्मिक ग्रंथों से दो विचार यात्राओं का उल्लेख किया गया है। धनखड़ के अनुसार पहली यात्रा रामायण में महाराज दशरथ के महल में और दूसरी महाभारत में कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में ज्योतिसर में दिखाई देती है। कैकेयी-मंथरा की संगति से विचारों की अधोगामी यात्रा रामायण का उदाहरण देते हुए धनखड़ बताते हैं कि श्रीराम के राज्याभिषेक की सूचना से कैकेयी प्रसन्न थीं। वह खुशी में मिठाई और आभूषण बांट रही थीं, लेकिन मंथरा के नकारात्मक और स्वार्थपूर्ण विचारों ने कैकेयी को अपने विचारों के स्तर तक ला दिया। इसे पुस्तक में विचारों की अधोगामी यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके परिणामस्वरूप कैकेयी का निर्णय न केवल उनके अपने जीवन बल्कि दशरथ, भरत और अयोध्या के इतिहास को प्रभावित करता है।
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