सीबीआई की विशेष अदालत ने तरनतारन में 35 साल पुराने अपहरण मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन कांस्टेबल कश्मीर सिंह को पांच साल कैद और 10,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कश्मीर सिंह इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। यह मामला गांव मालूवाल संत निवासी बलजीत सिंह के लापता होने से संबंधित है। बलजीत सिंह के भाई परमजीत सिंह के अनुसार, 7 अगस्त 1991 को बलजीत सिंह अपने भाई के साथ घर का सामान लेने झबाल स्टेशन गए थे। बस से उतरते ही, झबाल थाने के तत्कालीन हेड सूबा सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने बलजीत सिंह को जबरन हिरासत में ले लिया। परिवार बोला- पुलिस हिरासत से कभी नहीं लौटा बेटा पुलिस ने परिवार को बताया था कि पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा, लेकिन बलजीत सिंह कभी घर नहीं लौटे और पुलिस हिरासत से ही गायब हो गए। इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी। दो साल पहले, अदालत ने इस केस में नामजद तत्कालीन एसएचओ सूबा सिंह, अतिरिक्त एसएचओ दलबीर सिंह और हवलदार रवेल सिंह को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई थी। हवलदार कश्मीर सिंह उस समय से भगोड़ा था। उसने हाल ही में अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद अब उसे भी सजा सुनाई गई है। लापता बलजीत सिंह के परिवार, जिसमें उनके बेटे भी शामिल हैं, ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है। परिवार ने कहा कि इस कानूनी लड़ाई में 35 साल का लंबा समय लगा, लेकिन आखिरकार उन्हें न्याय मिला है, जिससे वे पूरी तरह संतुष्ट हैं।
Source link
तरनतारन में 35 साल पुराने अपहरण केस में फैसला:पूर्व पुलिस कांस्टेबल को 5 साल की जेल; हिरासत से लापता हुआ था युवक
