झज्जर जिले में पिछले दो-तीन महीनों में हुई कई सनसनीखेज हत्याओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कभी दोस्तों के बीच विवाद, कभी पैसों का लेनदेन, कभी खेत के रास्ते का झगड़ा और कभी पुरानी रंजिश। कारण भले अलग-अलग रहे हों, लेकिन एक बात लगभग हर वारदात में समान दिखाई दी ,अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल और गोलियों की बौछार। अब जिले के लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये हाईटेक हथियार युवाओं के हाथों तक पहुंच कैसे रहे हैं? इन्हें मुहैया कौन करवा रहा है? और अब तक ऐसे तस्कर पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं? गांवों के बुजुर्गों का कहना है कि पहले झगड़े पंचायतों में सुलझ जाते थे, लेकिन अब छोटी-छोटी बातों पर युवा सीधे हथियार उठा रहे हैं। आपसी विवाद खूनी संघर्ष में बदल रहे हैं और गांवों में भाईचारे की जगह बदले की भावना बढ़ती जा रही है। पुलिस कमिश्नर बोलीं- हथियारों के स्रोत का पता लगाने का प्रयास हाल ही में हुई वारदातों के बाद जब पुलिस कमिश्नर राजश्री से सवाल किया गया कि इन घटनाओं में इस्तेमाल हो रहे हाईटेक हथियार आखिर कहां से आ रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि पुलिस इसकी गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी ऐसे हथियार कहां से हासिल कर रहे हैं। हथियार उपलब्ध करवाने वाले लोगों और नेटवर्क तक पहुंचने के लिए पुलिस की विशेष टीम काम कर रही है और जांच जारी है। चार बड़ी वारदातों ने बढ़ाई चिंता डीघल का साहिल उर्फ सोनू हत्याकांड डीघल गांव में साहिल उर्फ सोनू की हत्या का मामला भी युवाओं के बीच आपसी रंजिश से जुड़ा बताया गया। मामूली विवाद ने दोनो तरफ से इतना बड़ा रूप ले लिया कि गोलियां चल गईं और गांव के युवकों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। बिरधाना में पत्नी की हत्या बिरधाना गांव में संजय द्वारा अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या करने की घटना ने भी पूरे जिले को हिला दिया था। पारिवारिक विवाद का अंत खून-खराबे में हुआ। सुबाना का हितेश गोलीकांड सुबाना गांव में हितेश और डीकेश कभी अच्छे दोस्त बताए जाते थे। लेकिन पैसों के लेनदेन और अन्य विवादों ने दोस्ती को दुश्मनी में बदल दिया। पहले हितेश ने डीकेश पक्ष पर फायरिंग की, फिर बदले में हितेश पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिया कि किस तरह दर्जनों गोलियां चलाई गईं। लोगों का कहना है कि झज्जर जिले में इससे पहले शायद ही कभी इतनी भयावह वारदात देखने को मिली हो। मामले में कई आरोपी अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। दुजाना का विजय सैनी हत्याकांड ताजा मामला दुजाना गांव के विजय सैनी की हत्या का है। बताया जा रहा है कि दुजाना और बिरधाना गांव के बीच खेत के रास्ते को लेकर शुरू हुआ विवाद वर्षों पुरानी दुश्मनी में बदल गया। पहले इसी विवाद में अनिल की हत्या हुई थी और अब उस मामले के मुख्य गवाह विजय सैनी को गोलियों से भून दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार हमलावरों ने कई राउंड फायर किए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इगो, पैसे और जमीन के विवाद बन रहे मौत की वजह ग्रामीणों का कहना है कि आज गांवों में सबसे ज्यादा विवाद अहंकार, पैसों के लेनदेन, सोशल मीडिया पर छींटाकशी और जमीन-जायदाद को लेकर हो रहे हैं। पहले जहां बुजुर्गों की बात मानी जाती थी, वहीं अब युवा जल्द गुस्से में आकर हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं। हाईटेक हथियार और गोलियों ने उजाड़ दिए परिवार जिले में बढ़ते हाईटेक हथियारों के इस्तेमाल ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। गोलियों की गूंज में कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई युवा अपराध के रास्ते पर चलकर सलाखों के पीछे पहुंच गए। नतीजा यह हुआ कि किसी परिवार ने अपना बेटा, पिता या भाई खो दिया तो किसी का घर जेल में बंद अपनों के कारण बिखर गया। आपसी रंजिश और हथियारों की संस्कृति ने केवल परिवारों को उजाड़ने का काम किया है, जिससे पूरे समाज में चिंता का माहौल बना हुआ है। खाप पंचायतों को आगे आने की जरूरत जिले के लोगों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। सामाजिक संगठनों और खाप पंचायतों को भी आगे आना होगा। दुजाना निवासी समाजसेवी रणबीर सैनी ने कहा कि गांवों में भाईचारे की परंपरा कमजोर होती जा रही है। खाप पंचायतों को युवाओं के बीच संवाद अभियान चलाना चाहिए ताकि विवाद बढ़ने से पहले सुलझ सकें। बिरधाना निवासी किसान राजेश का कहना है कि गांवों में बढ़ती गैंग संस्कृति बेहद चिंताजनक है। युवाओं को हथियार नहीं बल्कि शिक्षा और खेलों की ओर प्रेरित किया जाना चाहिए। डीघल निवासी सुरेंद्र पहलवान ने मांग की कि खाप पंचायतें संयुक्त बैठकों का आयोजन करें और युवाओं को बदले की भावना से दूर रहने का संदेश दें। सुबाना निवासी महेंद्र ने कहा कि यदि समाज समय रहते नहीं जागा तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। गांवों में आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करना जरूरी है। लोगों की प्रमुख मांगें जिले में हाईटेक हथियारों की सप्लाई चेन का खुलासा किया जाए। हथियार उपलब्ध करवाने वाले तस्करों की पहचान कर सख्त कार्रवाई हो। गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं। खाप पंचायतें सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ठोस निर्णय लें। युवाओं को खेल, शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के प्रयास बढ़ाए जाएं। सवाल अभी भी कायम झज्जर के लोगों का कहना है कि हर हत्या के बाद पुलिस जांच शुरू होती है, आरोपी भी पकड़े जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है—आखिर जिले में लगातार इस्तेमाल हो रहे ये अत्याधुनिक हथियार आ कहां से रहे हैं? जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता, तब तक हर नई वारदात के बाद यही चिंता लोगों के मन में बनी रहेगी कि अगला निशाना कौन होगा। गांवों का भाईचारा और युवाओं का भविष्य बचाने के लिए अब समाज, खाप पंचायतों और पुलिस को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
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झज्जर में बढ़ता खूनी ट्रेंड:आखिर युवाओं के हाथों तक कैसे पहुंच रहे हाईटेक हथियार? छोटी-छोटी रंजिशें ले रहीं जान, समाज और पुलिस दोनों के सामने बड़ा सवाल
