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जालंधर में नौ एमीनेंस स्कूल, चार में प्रिंसिपल नहीं



आंचल चड्डा |जालंधर पंजाब सरकार के स्कूल ऑफ एमीनेंस जिनमें स्पेस लैब, इंटीग्रेटेड लैब, आधुनिक खेल सुविधाएं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई क्वालिटी शिक्षा देने का दावा है, लेकिन जालंधर जिले के नौ स्कूल ऑफ एमीनेंस में से चार अभी भी रेगुलर प्रिंसिपल के बिना चल रहे हैं। स्कूल ऑफ एमीनेंस करतारपुर, फिल्लौर, नकोदर और मकसूदां में नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई है। इन स्कूलों में डीडीओ पावर वाले प्रिंसिपल, ऑफिशिएटिंग प्रिंसिपल या इंचार्ज अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्थिति यह है कि कहीं एक ही प्रिंसिपल तीन स्कूलों का काम देख रहे हैं तो कहीं चार स्कूलों का प्रशासन संभालना पड़ रहा है। इसके चलते वित्तीय कार्यों, बिलों, वेतन, बैठकों और प्रशासनिक फैसलों में दिक्कतें सामने आ रही हैं। उधर, स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव सोनाली गिरी ने कहा कि विभाग प्रिंसिपलों के पदों पर पदोन्नति के लिए नोटिस जारी करने से पहले हाईकोर्ट की अनुमति का इंतजार कर रहा है। पिछले वर्ष जारी किए गए पदोन्नति नोटिस के खिलाफ एक सिविल रिट याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद विभाग ने उस नोटिस को वापस ले लिया था। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (सीनियर सेकेंडरी) गुरिंदरजीत कौर ने कहा कि विभाग को उम्मीद है कि पदोन्नति प्रक्रिया के जरिए इन खाली पदों को भर दिया जाएगा। स्कूल ऑफ एमीनेंस मक्सूदां में भी डेढ़-दो साल से प्रिंसिपल का पद खाली है। डीडीओ पावर सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल कुमुद शर्मा के पास है, जबकि इंचार्ज एक वरिष्ठ लेक्चरर हैं। इंचार्ज को पढ़ाई के साथ प्रशासनिक व वित्तीय काम देखने पड़ते हैं। 1101 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल के अलावा डीडीओ का अपना स्कूल डबल शिफ्ट में चलने से प्रबंधन में समय की दिक्कत आ रही है। स्कूल ऑफ एमीनेंस नकोदर में जून में तबादले के बाद से प्रिंसिपल का पद खाली है। डीडीओ पावर बस्ती मिट्ठू स्कूल के प्रिंसिपल पवन कुमार के पास है। शिक्षकों को वेतन व फाइलों के दस्तखत के लिए जालंधर जाना पड़ता है। 520 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहे पवन कुमार का कहना है कि सेहत ठीक न होने के बावजूद 30 किमी दूर स्थित स्कूल संभालना चुनौतीपूर्ण है। स्कूल ऑफ एमीनेंस फिल्लौर में अप्रैल 2025 में रिटायरमेंट के बाद से प्रिंसिपल का पद खाली है। डीडीओ पावर गोराया गर्ल्स स्कूल के प्रिंसिपल तरलोक सिंह के पास है और इंचार्ज एक लेक्चरर हैं। आधुनिक स्पेस लैब वाले इस 1500 विद्यार्थियों के स्कूल में प्रशासनिक दिक्कतें आ रही हैं। तरलोक सिंह के पास गोराया गर्ल्स, गोराया बॉयज, फिल्लौर एमीनेंस और फिल्लौर गर्ल्स सहित चार स्कूलों का प्रभार है। शिक्षकों का कहना है कि एमीनेंस स्कूलों में नए प्रोजेक्ट्स और बैठकों के कारण नियमित प्रिंसिपल न होने से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की सफलता के लिए नियमित प्रिंसिपलों की तैनाती जरूरी है, ताकि शिक्षक केवल पढ़ाई और अधिकारी प्रबंधन पर ध्यान दे सकें। स्कूल ऑफ एमीनेंस करतारपुर में डेढ़ साल से नियमित प्रिंसिपल नहीं है। डीडीओ पावर पत्तड़ कलां स्कूल की प्रिंसिपल परमजीत कौर के पास है, जो खुसरोपुर स्कूल और बीएनओ का चार्ज भी संभाल रही हैं। उनका कहना है कि क्लर्क न होने से तीन-तीन स्कूलों का काम देखना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद करीब 600 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल के एक छात्र ने 12वीं में जिले में चौथा स्थान हासिल किया है।



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