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चंडीगढ़ में कुछ दिन पहले हुई तेज बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। सड़कें और गलियां पानी में डूब गई थीं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब इस पूरे मामले को लेकर चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद उन्हें पहली बार पता चला कि नगर निगम के पास ऐसी महंगी और आधुनिक मशीनें मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल बरसात से पहले सीवरेज और बारिश के पानी की निकासी वाली पाइपलाइन साफ करने के लिए किया जाता है। वहीं निगम कमिश्नर अमित कुमार से इस पूरे मामले का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है। मेयर ने कहा कि नगर निगम हर साल मानसून से पहले तैयारियों के नाम पर टेंडर जारी करता है, एजेंसियां नियुक्त की जाती हैं और उनके कर्मचारियों से सड़कों, गलियों तथा गटर के ढक्कन खोलकर सफाई करवाई जाती है। लेकिन केवल ऊपर से सफाई करने से समस्या का समाधान नहीं होता। नगर निगम ने पहले से खरीदी हैं विशेष मशीनें सौरभ जोशी ने कहा कि असली समस्या जमीन के नीचे बनी बारिश के पानी की पाइपलाइन में है। इन पाइपों में बड़ी मात्रा में रेत और मिट्टी जमा रहती है। जब तक पाइपलाइन अंदर से साफ नहीं होगी, तब तक बारिश का पानी आगे नहीं जा सकता और सड़कों पर जलभराव होता रहेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें बाद में पता चला कि नगर निगम के पास ऐसी विशेष मशीनें पहले से खरीदी हुई हैं, जो पाइपलाइन के अंदर जमा रेत और गाद निकालने का काम करती हैं। सवाल यह है कि जब मशीनें मौजूद थीं तो उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। पार्षदों से पूछा, किसी को नहीं थी जानकारी मेयर ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने पार्षदों से बातचीत की। उन्होंने हर पार्षद से पूछा कि क्या उनके वार्ड में बारिश से पहले या बाद में नगर निगम की ऐसी किसी मशीन से पाइपलाइन की सफाई करवाई गई थी। मेयर के अनुसार, अधिकांश पार्षदों ने जवाब दिया कि उन्हें ऐसी किसी मशीन के इस्तेमाल की जानकारी ही नहीं है। कई पार्षदों ने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र में कभी ऐसी मशीन काम करते नहीं देखी। कमिश्नर से मांगा पूरा हिसाब मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि उन्होंने नगर निगम के कमिश्नर अमित कुमार से इस पूरे मामले का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है। उन्होंने पूछा है कि नगर निगम ने अब तक कितनी मशीनें खरीदी हैं, उन पर कितना खर्च हुआ, वे मशीनें किन-किन क्षेत्रों में भेजी गईं और उनसे कितनी सड़कों, गलियों तथा वर्षा जल निकासी पाइपलाइन की सफाई करवाई गई। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि मशीनों का संचालन किस विभाग और किन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी तथा उनका वास्तविक उपयोग कितना हुआ। अफसरों की जिम्मेदारी होगी तय मेयर ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। यदि यह पाया गया कि मशीनें होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं किया गया या लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी इस मामले में जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर में जलभराव की समस्या मेयर ने कहा कि हर साल बारिश के दौरान शहर में जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नगर निगम के पास उपलब्ध संसाधनों और मशीनों का समय पर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर सुविधाएं देना नगर निगम की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
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