चंडीगढ़ प्रशासन ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। गृह मंत्रालय (MHA) को भेजे गए इस प्रस्ताव में मौजूदा एक साल के कार्यकाल को बढ़ाकर ढाई साल करने की मांग की गई है। लीगल और एडमिनिस्ट्रेटिव मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे अब संसद में पेश किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि एक साल का कार्यकाल किसी भी नीति या योजना को पूरी तरह लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसी वजह से कार्यकाल बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई है। इस प्रस्ताव को तैयार करते समय गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों के नगर निगमों में लागू व्यवस्था का भी अध्ययन किया गया है। 1994 में बना निगम प्रशासन ने अपने पत्र में पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 की धारा 38 में संशोधन का सुझाव दिया है, जो चंडीगढ़ में पंजाब नगर निगम विधि (चंडीगढ़ ) अधिनियम, 1994 के तहत लागू है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो चंडीगढ़ की नगर निगम व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। 1994 में नगर निगम बनने के बाद से अब तक मेयर का कार्यकाल सिर्फ एक साल का ही रहा है। इसी कारण बार-बार नेतृत्व बदलता रहा है। अब तक शहर में 32 मेयर बन चुके हैं, जिसमें 2001 में एक ही साल में तीन मेयर बने थे। रिजर्वेशन नीति बाद में तय होगी मेयर और अन्य पदों के लिए आरक्षण से जुड़े नियम संसद से संशोधन पास होने के बाद ही तय किए जाएंगे। सांसद मनीष तिवारी ने भी लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें मेयर का कार्यकाल 5 साल करने की मांग की गई थी। हालांकि यह बिल प्रशासन के मौजूदा प्रस्ताव से अलग है।
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