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चंडीगढ़ में अब स्टॉर्टअप शुरू करना आसान:ऑफिस से सेटअप तक की सुविधाएं मिलेगी, केवल किराया देना; 3 जुलाई तक अप्लाई कर सकते




चंडीगढ़ में अगर आप नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो आपको अब ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। प्रशासन ही आपका मददगार बनेगा। इमारत से लेकर सारा सेटअप प्रशासन मुहैया करवाने जा रहा है। इसके लिए राजीव गांधी आईटी पार्क स्थित एंटरप्रेन्योर डेवलपमेंट सेंटर (EDC) में खाली पड़े स्पेस आवंटित किए जाएंगे। स्टार्टअप कंपनियों को वहां सेंट्रलाइज्ड एसी और 24 घंटे पावर बैकअप (बिना एसी के), हाई-स्पीड इंटरनेट, कॉन्फ्रेंस हॉल, सेमिनार हॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम, आइडिएशन रूम और पार्किंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी। काम प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर होगा, ताकि वे आसानी से अपना कारोबार आगे बढ़ा पाएं। इसके लिए तीन जुलाई तक युवा आवेदन कर पाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया चलेगी। हालांकि, कंपनियों के आवेदन के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, जिनका उन्हें पालन करना होगा। चंडीगढ़ प्रशासन के मुताबिक EDC बिल्डिंग में दो तरह के स्पेस आवंटित किए जाएंगे। इसमें एक कैटेगरी इंक्यूबेशन बे स्पेस है, जबकि दूसरी कैटेगरी को-वर्किंग स्पेस है। अब दोनों कैटेगरी में समझिए क्या सुविधाएं मिलेंगी। कॉल सेंटर व बैंक वाले नहीं कर पाएंगे आवेदन आवेदन करने वाला स्टार्टअप केवल सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट, वेब डेवलपमेंट, डेटाबेस मैनेजमेंट, मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपमेंट या किसी भी तकनीक आधारित डेवलपमेंट सर्विसेज से जुड़ा होना चाहिए। कॉल सेंटर, बैंक ऑफिस, सेल्स एंड मार्केटिंग, BPO, KPO और ट्रेनिंग एजेंसियां इस आवंटन के लिए पात्र नहीं हैं। स्टार्टअप कंपनी, LLP, पार्टनरशिप फर्म या DPIIT से प्रमाणित होना चाहिए। स्टार्टअप का संचालन अधिकतम 10 वर्ष तक का हो और उसका सालाना टर्नओवर 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। कंपनी किसी भी सरकारी संगठन द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं होनी चाहिए। एक साल के लिए दिया जाएगा इंक्यूबेशन बे का आवंटन शुरू में 1 वर्ष के लिए होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। को-वर्किंग स्पेस न्यूनतम 6 महीने के लिए भी आवंटित किया जा सकता है। हर महीने की 7 तारीख तक 100% एडवांस लाइसेंस फीस जमा करानी होगी। देरी होने पर इंक्यूबेशन बे के लिए 500 रुपये प्रतिदिन और को-वर्किंग स्पेस के लिए 100 रुपये प्रति सीट प्रतिदिन की पेनल्टी लगेगी। हर साल पूरा होने पर लाइसेंस फीस में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी। आवंटित स्पेस को किसी अन्य को सब-लेट (किराए पर) देने की अनुमति नहीं होगी। भवन के भीतर धूम्रपान और शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। 3 प्वाइंट में जानिए चंडीगढ़ में स्टार्टअप की कहानी… 1. 2025 तक थे 633 स्टार्टअप चंडीगढ़ का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले एक दशक में तेजी से विकसित हुआ है। संसद में केंद्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में चंडीगढ़ में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 10 से भी कम थी, जो 31 अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 633 हो गई। इन स्टार्टअप्स ने 6,260 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं। इनमें से 297 स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है, जो महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। 2. कोई भी यूनिकॉर्न स्टार्टअप नहीं
लोकसभा में केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ में अभी तक एक भी यूनिकॉर्न स्टार्टअप नहीं है। हालांकि, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत यहां के स्टार्टअप्स को सहायता मिली है। स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स योजना के माध्यम से लगभग 21.30 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के तहत 2.89 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जबकि 15 स्टार्टअप्स को आयकर अधिनियम की धारा 80-आईएसी के तहत कर लाभ प्राप्त हुआ है। 3. नई पॉलिसी तक बनाई
चंडीगढ़ प्रशासन ने अप्रैल 2025 में चंडीगढ़ स्टार्टअप नीति-2025 लागू की। इस नीति का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में 200 से अधिक नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नीति के तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को अनुदान, पेटेंट सहायता, प्रमाणन सहायता, एक्सेलेरेशन कार्यक्रम, किराया सहायता और मुफ्त इनक्यूबेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य चंडीगढ़ को नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) और प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।



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