चंडीगढ़ के उद्योग संगठनों ने मास्टर प्लान-2031, औद्योगिक नियमों और लैंड यूज पॉलिसी में ऐसे बदलाव करने की मांग की है, जिससे उद्योगों को फायदा हो। सार्वजनिक सुनवाई में व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्क्रीनिंग कमेटी को अपने सुझाव दिए। उनका कहना था कि नियम आसान होने चाहिए, ताकि उद्योगों का विस्तार आसानी से हो सके और कारोबार पर ज्यादा खर्च का बोझ न पड़े। FAR बढ़ाने के साथ फीस कम करने की मांग उद्योग संगठनों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल कन्वर्टेड प्लॉट ओनर्स एसोसिएशन चेयरमैन चंदर वर्मा ने कहा कि अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) देने के लिए प्रशासन ने जो शर्तें रखी हैं, वे व्यावहारिक नहीं हैं। उनका कहना है कि शहर के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की क्षमता को आधार बनाकर FAR सीमित करना उचित नहीं है। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसका बोझ उद्योगों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उद्योग संगठनों ने मांग की कि अतिरिक्त FAR के लिए ली जाने वाली फीस कम की जाए। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा में यह शुल्क कम है, इसलिए चंडीगढ़ में भी फीस घटाई जाए, ताकि यहां के उद्योग दूसरे राज्यों के उद्योगों के बराबर कारोबार कर सकें। कन्वर्टेड इंडस्ट्रियल प्लॉट को मिले अतिरिक्त FAR व्यापार संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन औद्योगिक प्लॉटों का उपयोग बदला गया है, उन्हें अनिवार्य सर्विस एरिया के कारण होने वाले स्थान के नुकसान की भरपाई के लिए 0.50 अतिरिक्त FAR दिया जाए। साथ ही, फैक्ट्री परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास को कुल FAR की गणना से बाहर रखा जाए। उद्योग संगठनों ने प्रशासन के उस प्रस्ताव का भी विरोध किया, जिसमें अधिक FAR का लाभ लेने के लिए पुरानी इमारत को गिराकर दोबारा निर्माण करना अनिवार्य बताया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा इमारतों पर ही ऊपरी मंजिल बनाने की अनुमति दी जाए और इसके लिए मंजूरी की प्रक्रिया सरल बनाई जाए। इससे उद्योगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। ग्राउंड कवरेज और मिक्स्ड लैंड यूज में छूट की मांग संगठनों ने सक्रिय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अधिक ग्राउंड कवरेज की अनुमति देने की मांग की। इसके अलावा, फेज-3 की तरह फेज-1 और फेज-2 के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मिक्स्ड लैंड यूज की सुविधा लागू करने का सुझाव दिया गया। उद्योग संगठनों ने कहा कि अनिवार्य सेंट्रल कोर्टयार्ड (आंगन) जैसे नियमों से भवन का उपयोग प्रभावित होता है और उत्पादन क्षमता घटती है। इसलिए इन नियमों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जाएं। साथ ही, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या कब्जे के दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति रखने वालों को भी अतिरिक्त FAR का लाभ देने, MSME अधिनियम के तहत सभी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मान्यता देने तथा भवन उल्लंघन और मिसयूज से जुड़े लंबित नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई। उन्होने कहा यदि प्रशासन अधिक FAR, कम शुल्क, मिक्स्ड लैंड यूज और आसान नियमों वाली संतुलित नीति लागू करता है तो चंडीगढ़ में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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