चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बीटेक पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण लागू कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और चंडीगढ़ प्रशासन की अधिसूचना के बाद संस्थान ने नई आरक्षण व्यवस्था लागू कर दी है। इसके साथ ही बीटेक की कुल सीटों में भी बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल जहां करीब 703 सीटें थीं, वहीं इस बार इनकी संख्या बढ़कर करीब 800 हो गई है। नई व्यवस्था के तहत ओबीसी वर्ग के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण से शुरुआत की गई है। चंडीगढ़ प्रशासन की नीति के अनुसार इसे आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 27 प्रतिशत तक किया जाएगा। सीटें बढ़ने से सामान्य, अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के विद्यार्थियों को भी अतिरिक्त सीटों का लाभ मिलेगा। पेक में दाखिले पहले की तरह 50 प्रतिशत चंडीगढ़ कोटा और 50 प्रतिशत अन्य राज्यों के कोटे के आधार पर होंगे। दोनों कोटों में आरक्षण की व्यवस्था लागू रहेगी और पहली बार ओबीसी आरक्षण भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगा। बीटेक दाखिला प्रक्रिया जेईई एडवांस के परिणाम के बाद शुरू होगी। प्रवेश संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (जोसा) और केंद्रीय सीट आवंटन बोर्ड (सीएसएबी) के माध्यम से किए जाएंगे। ओबीसी कोटे में नई सीटें 3 प्रतिशत आरक्षण के तहत विभिन्न पाठ्यक्रमों में ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए नई सीटें तय की गई हैं। एयरोस्पेस और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग में 1-1 सीट, सिविल में 3 सीटें, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 1 सीट, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में 2 सीटें और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 4 सीटें आरक्षित की गई हैं। इनका आवंटन चंडीगढ़ और अन्य राज्यों के कोटे के अनुसार होगा। सामान्य वर्ग को भी फायदा सीटें बढ़ने से सामान्य वर्ग के लिए भी अवसर बढ़े हैं। सिविल, कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में सामान्य वर्ग की सीटें 73 से बढ़कर 85 हो गई हैं। इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 73 से बढ़कर 87 सीटें कर दी गई हैं। एयरोस्पेस में 17 से 19, प्रोडक्शन में 24 से 27 और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में 30 से बढ़ाकर 43 सीटें कर दी गई हैं। अन्य आरक्षित वर्गों की सीटें भी नियमानुसार अलग से निर्धारित की गई हैं।
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