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चंडीगढ़ दो बड़ी वारदातों के बाद भी नहीं चेती पुलिस:नाकाबंदी पर उठे सवाल, पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हुए RPG हमले का आरोपी शामिल




चंडीगढ़ में लगातार हुई दो बड़ी आपराधिक वारदातों ने एक बार फिर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और नाकाबंदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले 13 जून को सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकी दास की दिनदहाड़े हत्या हुई और उससे पहले सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय के बाहर ग्रेनेड अटैक कर आरोपी शहर से फरार हो गए। अब सेक्टर-7 स्थित क्लब के बाहर हथियार लहराने, मारपीट, जान से मारने की धमकी देने और हंगामा करने के बाद आरोपी पुलिस की मौजूदगी के बावजूद फरार हो गए। दोनों मामलों के बाद पुलिस की नाकाबंदी और चेकिंग व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सेक्टर-7 क्लब में बदमाशों ने पहले क्लब के अंदर एक युवक के साथ मारपीट की। इसके बाद बाहर आकर काफी देर तक हंगामा किया। शिकायत में आरोप है कि आरोपी क्लब मालिक और अन्य लोगों को जान से मारने की धमकी देते रहे। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर पिस्तौल लहराई, बीएमडब्ल्यू कार से लोगों को कुचलने की कोशिश की और वहां खड़ी कई गाड़ियों को टक्कर मारते हुए मौके से फरार हो गए। एफआईआर में नामजद आरोपियों में जगदीप सिंह कंग उर्फ जग्गी का नाम भी शामिल है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह मोहाली स्थित पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर वर्ष 2022 में हुए आरपीजी हमले के मामले में भी आरोपी रह चुका है। ऐसे आरोपी का चंडीगढ़ में खुलेआम घूमना और वारदात के बाद फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्लब वाले मामले में पुलिस ने छात्र की शिकायत के आधार पर 5 लोगों के खिलाफ के केस दर्ज कर लिया है। इसमें पंजाबी सिंगर करण औजला के मैनेजर बलदीप सिंह सराओ उर्फ बाली और 9 मई 2022 को मोहाली में पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हमले के आरोपी जगदीप सिंह कंग उर्फ जग्गी का नाम शामिल है। घटना के वक्त पुलिस कर रही थी गश्त पता चला है कि जब बदमाश क्लब के अंदर मारपीट करने के बाद बाहर आए और वहां हंगामा करने लगे, उस दौरान पुलिस वहीं गश्त कर रही थी। शोर-शराबा सुनकर पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। इसी दौरान बदमाश पिस्तौल दिखाते हुए वहां से फरार हो गए और रास्ते में खड़ी गाड़ियों को टक्कर मार दी। सेक्टर-11 में जब कैशियर जानकी दास की हत्या हुई थी, उस दौरान भी सामने पुलिस का नाका लगा हुआ था, लेकिन शूटर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए थे। सेक्टर-11 हत्याकांड के बाद किए थे बड़े दावे 13 जून 2026 को सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकी दास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय भी पुलिस ने दावा किया था कि पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी गई है और शहर से बाहर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर सख्त चेकिंग की जा रही है। इसके बावजूद आरोपी वारदात के बाद शहर से निकलने में सफल रहे। इस घटना के बाद पुलिस ने नई बैरिकेडिंग लगाई, कई स्थानों पर स्थायी नाके बनाए और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दावा किया था। हालांकि सेक्टर-7 क्लब की घटना के बाद एक बार फिर वही सवाल खड़े हो गए हैं कि यदि नाकाबंदी इतनी सख्त थी तो आरोपी हथियारों के साथ वारदात करने के बाद शहर से बाहर कैसे निकल गए। लगातार दूसरी घटना से उठे सवाल तीन बड़ी घटनाओं ने चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था, नाकाबंदी और त्वरित कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे पहले सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला हुआ, जिसके बाद चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे शहर में हाई अलर्ट, नाकाबंदी और हर एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर वाहनों की गहन जांच के दावे किए थे। इसके बावजूद हमले में शामिल आरोपी मौके से फरार हो गए। इसके बाद 13 जून 2026 को सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकी दास की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद भी पुलिस ने पूरे शहर में नई बैरिकेडिंग लगाने, सभी प्रमुख चौराहों पर नाके बढ़ाने और बाहर जाने वाले हर रास्ते पर कड़ी चेकिंग का दावा किया, लेकिन हत्या के आरोपी भी शहर से निकलने में सफल रहे। अब सेक्टर-7 स्थित कोमो हाउस क्लब के बाहर हुई घटना में भी आरोप है कि बदमाशों ने पहले क्लब के अंदर मारपीट की, फिर बाहर काफी देर तक हंगामा किया, हथियार लहराए, लोगों को धमकाया, गाड़ियों को टक्कर मारी और पुलिस के मौके पर पहुंचने के बावजूद फरार हो गए। लगातार हुई इन घटनाओं के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि शहर में हर बार सख्त नाकाबंदी और चेकिंग के दावे किए जाते हैं, तो गंभीर वारदातों के आरोपी बार-बार शहर से बाहर निकलने में कैसे सफल हो रहे हैं। पुलिस अपना काम कर रही है डीएसपी पी. अभिनंदन ने कहा कि जिन आरोपियों ने क्लब में मारपीट की और बाद में पिस्तौल दिखाई, उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। पता चला है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पंजाब में प्रवेश करते ही अपने मोबाइल फोन बंद कर चुके थे। पुलिस टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।



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