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चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर पर फिर अड़चन:पेड़ों की कटाई रोकने की मांग, हाईकोर्ट में 30 अप्रैल अगली सुनवाई,मास्टर प्लान के खिलाफ प्रोजेक्ट




चंडीगढ़ के ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान पेड़ों की कटाई और टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई गई। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग करते हुए कहा कि अंतिम फैसला आने तक न तो पेड़ों की कटाई की जाए और न ही टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर टेंडर जारी किया जाता है, तो उसे कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रखा जाए। मास्टर प्लान के खिलाफ बताया प्रोजेक्ट सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने विस्तार से दलील देते हुए चंडीगढ़ के मास्टर प्लान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शहर को बनाते समय इसकी योजना इस तरह तैयार की गई थी कि यहां पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और हरित क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाए। सड़कों, सेक्टरों और सार्वजनिक स्थानों का डिजाइन भी इसी सोच के अनुसार रखा गया था, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम रहे और पर्यावरण संतुलित बना रहे। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उस मूल योजना में फ्लाईओवर जैसी भारी-भरकम संरचनाओं का कोई प्रावधान नहीं था। उनका तर्क था कि इस तरह के प्रोजेक्ट शहर की बुनियादी अवधारणा को बदल देते हैं और धीरे-धीरे चंडीगढ़ को भी अन्य बड़े शहरों की तरह भीड़भाड़ और वाहन-आधारित बना सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फ्लाईओवर बनने से निजी और सार्वजनिक वाहनों का दबाव और बढ़ेगा, जिससे पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए जगह और कम हो जाएगी। साथ ही बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होने से हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचेगा, जो शहर की पहचान का अहम हिस्सा है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि इस परियोजना को लागू करना न सिर्फ मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि इससे पर्यावरण और शहरी संतुलन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है, इसलिए इसे रोकना जरूरी है। कोर्ट ने कहा- जल्दबाजी में फैसला नहीं अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ एक फ्लाईओवर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शहर की योजना, पर्यावरण और सार्वजनिक हित जैसे अहम मुद्दे जुड़े हुए हैं। इसलिए इस पर जल्दबाजी में या केवल अंतरिम सुनवाई के आधार पर अंतिम फैसला देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि सभी पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं को विस्तार से समझना जरूरी है। इसके बाद ही कोई ठोस और संतुलित निर्णय लिया जा सकता है, ताकि किसी पक्ष के साथ अन्याय न हो और शहर के हित भी सुरक्षित रहें। पेड़ों की कटाई पर पहले से रोक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई पर पहले से ही रोक लागू है और नियमों का पालन करना जरूरी है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी भी परियोजना में पेड़ काटने से पहले तय प्रक्रिया और मंजूरी लेना अनिवार्य है। हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह रोक चंडीगढ़ प्रशासन पर सीधे तौर पर लागू होती है या नहीं। उन्होंने कोर्ट से इस बारे में स्पष्ट आदेश देने की मांग की, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे और पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित की जा सके।



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