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चंडीगढ़ कोर्ट से माउंट कार्मल स्कूल को झटका:फीस बढ़ोतरी अवैध घोषित, दोगुनी वृद्धि का आरोप लगाकर आभिभावकों ने की थी अपील




चंडीगढ़ सेक्टर-47 स्थित माउंट कार्मल स्कूल द्वारा वर्ष 2017-18 में की गई फीस बढ़ोतरी को जिला अदालत ने अवैध करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले से 349 पेरेंट्स को राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूल केवल 8 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकता है। इससे ज्यादा फीस वसूलने या फीस न देने पर किसी छात्र का दाखिला रोकने की अनुमति नहीं होगी। यह मामला वर्ष 2017 में सामने आया था, जब स्कूल ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए फीस में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इसके खिलाफ 349 पेरेंट्स ने स्कूल प्रबंधन, चंडीगढ़ प्रशासन और सीबीएसई के खिलाफ जिला अदालत में सिविल केस दायर किया था। फीस दोगुनी करने का आरोप पेरेंट्स की और से हाईकोर्ट में एडवोकेट बलजीत सिंह सैणी ने पैरवी की, उन्होने बताया फरवरी 2017 में हुई पेरेंट्स-टीचर मीटिंग के दौरान उन्हें नोटिस बोर्ड पर फीस बढ़ोतरी की जानकारी मिली। उनका आरोप था कि स्कूल ने नर्सरी से 12वीं तक की मासिक ट्यूशन फीस में 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी। पहले जहां फीस करीब 2700 रुपए थी, उसे बढ़ाकर 4800 से 4975 रुपए तक कर दिया गया। पेरेंट्स का कहना था कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई और न ही इसका कोई संतोषजनक कारण बताया गया। फीस बढ़ोतरी का विरोध करने के लिए पेरेंट्स ने स्कूल प्रबंधन से बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद 5 फरवरी 2017 को माउंट कार्मल पेरेंट्स एसोसिएशन का गठन किया गया। एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन और सीबीएसई को भी शिकायत दी, लेकिन जब वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पेरेंट्स ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। फीस तय करना उसका अधिकार स्कूल प्रबंधन ने अदालत में कहा कि वह एक गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल है और फीस तय करना उसका अधिकार है। स्कूल का कहना था कि छात्रों को बेहतर सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत होती है। स्कूल ने यह भी दलील दी कि फीस में बढ़ोतरी की जानकारी पहले से फीस बुक में दी जाती रही है और पेरेंट्स पहले भी ऐसी बढ़ोतरी स्वीकार करते आए हैं। 8 प्रतिशत से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते पेरेंट्स ने अदालत को बताया कि उस समय पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों को एक साल में 8 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए थे। चंडीगढ़ प्रशासन ने भी इसी तरह की नीति अपनाई थी। इसके बावजूद स्कूल ने फीस में बहुत अधिक बढ़ोतरी कर दी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला अदालत ने पेरेंट्स की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने वर्ष 2017-18 की फीस बढ़ोतरी को अवैध घोषित करते हुए कहा कि स्कूल केवल 8 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पेरेंट्स केवल 8 प्रतिशत बढ़ी हुई फीस देने के लिए बाध्य होंगे। इसके अलावा स्कूल किसी छात्र का दाखिला सिर्फ इसलिए नहीं रोक सकता क्योंकि उसके पेरेंट्स ने बढ़ी हुई फीस जमा नहीं की।



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