चंडीगढ़ की सुखना लेक पर आने वाले दिनों में लोग गोवा की तर्ज पर सोलर एनर्जी से चलने वाले क्रूज का आनंद उठा पाएंगे। यह संभव होने जा रहा है चंडीगढ़ प्रशासन की पहल से, जिसके तहत गोवा की कंपनी से खरीदा गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह एनवायरनमेंट-फ्रेंडली है। इसके चलने में किसी तरह का तेल, डीजल प्रयोग हीं होता है। ऐसे में धुआं नहीं निकलता है। वहीं, बाहर से आने वाले पक्षियों के लिए भी यह बेहतर है। किसी भी तरह के मौसम में चलने में समक्ष यह क्रूज सुखना लेक पर मौजूद नावों की तुलना में काफी बड़ा और भारी है, जिससे तेज हवा या मौसम खराब होने पर भी यह पानी में पूरी तरह संतुलित और सुरक्षित रहता है। इसकी क्षमता डेढ़ सौ सवारियों की है। लेकिन प्रशासन खुद तय करेगा कि कितनी क्षमता रखनी है। इसके अलावा, रात के समय इसमें लगी एलईडी (LED) लाइट्स लेक के नाइट-व्यू को बेहद खूबसूरत बनाती हैं। वहीं, बैठने के लिए भी अंदर आरामदायक व्यवस्था है, जिससे छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी बिना किसी थकान के लेक की सैर कर सकते हैं। क्रूज में बैठकर आप शिवालिक रेंज का नजारा ले पाएंगे। सोफा सेट वाली कुर्सियों, सुरक्षा के पूरे इंतजाम क्रूज सुखना लेक पर पहुंच गया है। अब इसमें सोलर पैनल फिट किए जा रहे हैं। इसके बाद इसे लेक में छोड़ा जाएगा। माना जा रहा है कि जुलाई तक यह प्रोसेस शुरू हो जाएगा। इसके अदंर सोफा सेट वाली कुर्सियां होगी। इसमें एक ग्राउंड फ्लोर होगी। जबकि एक दूसरी मंजिल होगी। इसके दोनों तरफ सुरक्षा के लिए स्टील की ग्रिल होगी। कंपनी द्वारा इसे वोट पर ही आखिरी रूप दिया जा रहा है। हालांकि गर्मी अधिक होने से इस काम में दिक्कत आ रही है। आधे घंटे के लिए 370 रुपए किराया नए क्रूज का अभी तक किराया फाइनल नहीं है। हालांकि माना जा रहा है कि यह लगभग 370 रुपये प्रति व्यक्ति हो सकता है। क्योंकि पहले चलने वाले लग्जरी क्रूज का रेट इसी तरह तय है। इससे पहले झील पर पहले से मौजूद छोटी सोलर बोट/क्रूज़ का किराया लगभग 100 रुपये प्रति व्यक्ति से शुरू होता है। क्रूज़ राइड सुबह से शाम को सूरज डूबने तक, 7:30 बजे तक ली जा सकती है। अब तक लेक पर एक ही क्रूज है। इस वजह से उसकी डिमांड ज्यादा रहती है। इसके चलते अब यह दूसरा क्रूज लाया गया है। तेल रिसाव होने से पक्षी हुए परेशान 5 जनवरी 2026 की शाम को चंडीगढ़ की सुखना लेक के रेगुलेटरी एंड पर एक स्टीमर या क्रूज बोट से हुए भारी तेल रिसाव के कारण पानी की सतह पर करीब 200 मीटर के दायरे में काले तेल की गाढ़ी परत फैल गई। 16 जनवरी 2026 को पंजाब यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (CPCC) द्वारा लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि इस तेल की परत के कारण पानी में घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर बेहद खतरनाक रूप से गिर गया, जिससे दम घुटने के कारण क्लेरियस और तिलापिया प्रजाति की सैकड़ों मछलियां तथा एक अजगर मृत पाए गए. इस पारिस्थितिक संकट के बाद प्रशासन ने तुरंत रणनीति के तहत 16 जनवरी 2026 की सुबह विशेष सक्शन पंपों के जरिए दूषित तेल को बाहर निकाला, झील में तेल व ईंधन से चलने वाली सभी नावों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, और भविष्य की सुरक्षा के लिए वर्ल्ड वाइडलाइफ फंड (WWF) के साथ मिलकर कड़े निगरानी नियम लागू करने और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस जांच करने के आदेश दिए।
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