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चंडीगढ़ का पहला ऑटोमेटेड व्हीकल इंस्पेक्शन सेंटर अटका:14 करोड़ की बिल्डिंग तैयार, मशीनें नहीं लगीं; 15 साल पुराने वाहनों के होंगे टेस्ट




चंडीगढ़ के रायपुर कलां में बनने वाला शहर का पहला ऑटोमेटेड इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन (IC) सेंटर फिर अटक गया है। केंद्र सरकार की फंडिंग से 3.5 एकड़ जमीन पर करीब ₹14 करोड़ की लागत से तैयार सेंटर की बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन जांच के लिए जरूरी मशीनरी और उपकरण अब तक इंस्टॉल नहीं किए गए हैं। इसके चलते सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा। यह सेंटर 15 साल पुराने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए तैयार किया गया है। इनमें टैक्सी, बस, ट्रक और अन्य मालवाहक व भारी वाहन शामिल होंगे। वाहनों की फिटनेस जांच मैनुअल तरीके से नहीं, बल्कि पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए की जाएगी। 2019 में मिली थी मंजूरी, चार डेडलाइन हो चुकीं मिस केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2019 में मंजूरी दी थी। इसे वर्ष 2022 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन फंडिंग और प्रशासनिक देरी के कारण यह समयसीमा पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद 2023, 2024 और 2025 की डेडलाइन भी निकल गई। अब सिविल निर्माण का काम पूरा हो चुका है और मशीनरी इंस्टॉल होने के बाद सेंटर को शुरू करने की तैयारी है। 23 मानकों पर होगी वाहनों की ऑटोमेटिक जांच ऑटोमेटेड सेंटर में वाहनों की फिटनेस की जांच करीब 23 अलग-अलग मानकों पर की जाएगी। इनमें ब्रेकिंग सिस्टम, मैकेनिकल क्षमता, वाहन की बॉडी और स्ट्रक्चर, उत्सर्जन और प्रदूषण स्तर समेत अन्य तकनीकी जांच शामिल होगी।इस पूरी प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम रहेगा। इससे फिटनेस टेस्ट में किसी तरह की मनमानी या पक्षपात की गुंजाइश भी कम होगी। अनफिट वाहन सड़क से होंगे बाहर फिटनेस टेस्ट में फेल होने वाले वाहनों को अनफिट घोषित किया जाएगा। 15 साल की निर्धारित अवधि पूरी कर चुके और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों को व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत कबाड़ किया जा सकता है। इससे सड़कों पर पुराने और खतरनाक कमर्शियल वाहनों की संख्या कम होने की उम्मीद है। सड़क सुरक्षा और प्रदूषण पर पड़ेगा असर वर्तमान में वाहनों की फिटनेस जांच मैनुअल तरीके से होती है। ऐसे में खराब या अनफिट वाहनों को भी फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने की आशंका रहती है। ऑटोमेटेड सेंटर शुरू होने के बाद वाहनों की डिजिटल और मानकीकृत जांच होगी। इससे एक ओर सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, वहीं पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें सड़क से हटाने में मदद मिलेगी। इससे चंडीगढ़ की हवा की गुणवत्ता सुधारने में भी सेंटर की अहम भूमिका हो सकती है।



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