गुरुग्राम की PCPNDT (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक) टीम ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के मेरठ में बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने एक डिकॉय ऑपरेशन चलाया, जिसमें गर्भवती महिला को नकली ग्राहक बनाकर भेजा गया। जांच में सामने आया कि सरधना स्थित केयर डायग्नोस्टिक सेंटर में दलाल नदीम गुरुग्राम की गर्भवती महिलाओं से 15 से 20 हजार रुपए लेकर भ्रूण के लिंग की जानकारी उपलब्ध कराता था। गर्भ में लड़की होने की स्थिति में गर्भपात कराने की व्यवस्था भी की जाती थी। 25 जून को गुरुग्राम और मेरठ स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने डिकॉय ग्राहक के माध्यम से कार्रवाई की। लड़का होने की जानकारी दी टीम के अनुसार महिला से 15 हजार रुपये लेकर उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया और बाद में उसे गर्भ में लड़का होने की जानकारी दी गई। इसके बाद टीम ने केंद्र पर छापा मारकर आरोपी नदीम और डॉ. कृष्ण कबीर को पकड़ लिया। मौके से 14,500 रुपये भी बरामद किए गए। अवैध रूप से की जा रही जांच जांच में पाया गया कि संबंधित अल्ट्रासाउंड मशीन और चिकित्सक PCPNDT अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं थे। यह भी सामने आया कि संस्थान को पहले ही बंद करने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जा चुकी थी। इसके बावजूद अवैध रूप से यहां जांच की जाती थी। छापामार टीम का विरोध किया कार्रवाई के दौरान केंद्र से जुड़े योगेश, डॉ. एम. चंद्रा और डॉ. शैला रहमान के नाम भी सामने आए। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने का भी प्रयास किया गया और आरोपियों ने टीम को खदेड़ने की कोशिश की। मामला दर्ज करने की सिफारिश की नोडल अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार की शिकायत पर नदीम, डॉ. कृष्ण कबीर, योगेश, डॉ. एम. चंद्रा, डॉ. शैला रहमान समेत अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं और PCPNDT अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
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