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गुरुग्राम में भर्ती वांगचुक ने अनशन तोड़ा:मेदांता पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद लिया फैसला




नीट परीक्षा विसंगतियों और पेपर लीक मामले के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र से मुलाकात के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है। अनशन समाप्त होने के बाद वांगचुक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही किसी भी समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए गए वांगचुक को आईसीयू में रखकर डॉक्टरों की एक स्पेशल मल्टी डिसिपलिनरी टीम की देखरेख में इलाज किया जा रहा है। अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी की ओर से जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सोनम वांगचुक की स्थिति पूरी तरह स्टेबल और वे पूरी तरह होश में है। उन्होंने स्पष्ट किया गया है कि उनके सभी वाइटल साइंस स्वीकृत मापदंडों के भीतर हैं और उन्हें दिया जा रहा सारा इलाज उनकी सहमति के आधार पर ही किया जा रहा है। चिट्ठी के बाद भी सरकार से कोई सीधी बातचीत नहीं वांगचुक ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक औपचारिक चिट्ठी भेजी थी। इस पत्र में उन्होंने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा है कि यदि सरकार उन्हें यह लिखित और स्पष्ट आश्वासन देती है कि ‘चलो संसद’ मार्च और इस आंदोलन में शामिल हुए किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वे आज ही अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। हालांकि, इस पत्र और अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों की संक्षिप्त मुलाकात के बावजूद, अब तक सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच मांगों को लेकर कोई ठोस या आधिकारिक बातचीत शुरू नहीं हो सकी है। गतिरोध जस का तस बना हुआ है और वांगचुक ने साफ किया है कि बिना लिखित आश्वासन के वे अपना अनशन वापस नहीं लेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सीजेपी और वांगचुक का रूख अलग दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के आईसीयू में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बीच अब मांगों को लेकर अलग रूख दिखने लगी है। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे राजनीतिक संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेताओं का पूरा ध्यान इस समय इस बात पर केंद्रित है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। पार्टी इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार की पूरी जवाबदेही तय करने पर अड़ी है। वहीं अस्पताल के बेड से जारी अपनी चिट्‌ठी और वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने एक अलग रुख अपनाया है। वांगचुक की प्राथमिकता राजनीतिक इस्तीफों के बजाय आंदोलन में शामिल युवाओं का भविष्य बचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल हुए निर्दोष छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई या एफआईआर न करने का लिखित आश्वासन दे, तो वे अपना अनशन खत्म करने को तैयार हैं। जंतर-मंतर बनाम मेदांता अस्पताल: चार एक्सपर्ट से समझे आंदोलन का भविष्य आंदोलन का राजनीतिकरण बनाम नैतिक साख: गुरुग्राम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट मनीष शांडिल्य का कहना है कि सोनम वांगचुक की ताकत हमेशा से उनकी गैर-राजनीतिक और नैतिक साख रही है। उनका ध्यान पूरी तरह से छात्रों के भविष्य और लद्दाख के मुद्दों पर केंद्रित है। दूसरी तरफ, कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग इस पूरे मामले को एक सीधे राजनीतिक टकराव में बदल रही है। इसके कारण आम जनता, जो अब तक वांगचुक के नैतिक संघर्ष से जुड़ी थी, आंदोलन से दूरी बना सकती है। आम लोग इसे केवल एक राजनीतिक समझकर समर्थन वापस ले सकते हैं। प्रदर्शनकारियों में हो सकता है भ्रम: किसी भी बड़े आंदोलन की सफलता उसके एक सुर और एकजुट नेतृत्व पर निर्भर करती है। यदि जंतर-मंतर पर बैठा धड़ा (CJP) इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहता है और वांगचुक केवल छात्रों की सुरक्षा का लिखित आश्वासन लेकर अनशन तोड़ देते हैं, तो आंदोलन दो हिस्सों में बंट जाएगा। इससे जमीन पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा होगा कि वे किसके साथ जाए। इससे आंदोलन की धार कमजोर हो सकती है। सरकार को मिलेगा ‘एग्जिट रूट’ : प्रदर्शनकारियों के बीच की इस तरह की स्थिति सीधे तौर पर सरकार के पक्ष में काम करेगी। सरकार वांगचुक की नरम और व्यावहारिक मांगों को मानकर उनके साथ समझौता कर सकती है। ऐसा होने पर वांगचुक का अनशन समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सरकार जंतर-मंतर पर डटी कॉकरोच जनता पार्टी की ‘इस्तीफे’ की मांग को “विपक्ष की राजनीतिक साजिश” बताकर आसानी से खारिज कर पाएगी। युवाओं और छात्रों के मनोबल पर असर: इस आंदोलन की मुख्य रीढ़ वे छात्र और युवा हैं जो नीट परीक्षा से प्रभावित हुए हैं। वांगचुक का रुख व्यावहारिक है क्योंकि वे जानते हैं कि कानूनी मुकदमों से छात्रों का पूरा करियर तबाह हो सकता है। यदि सीजेपी अपनी जिद के कारण इस लिखित आश्वासन को ठुकराकर इस्तीफे की राजनीति को तरजीह देता है, तो छात्र खुद को असुरक्षित महसूस कर सकते हैं।



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