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गुरुग्राम कोर्ट शिफ्टिंग का रास्ता साफ:हाईकोर्ट ने 'टावर ऑफ जस्टिस' में ट्रांसफर की दी अनुमति; पर्यावरण-फायर NOC का इंतजार




गुरुग्राम के नए न्यायिक परिसर ‘टावर ऑफ जस्टिस’ में जिला अदालतों को तत्काल शिफ्ट करने का रास्ता साफ हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि औपचारिक पर्यावरण मंजूरी और फायर विभाग की अंतिम अनुमति का इंतजार करते हुए भी अदालतों को नए परिसर में स्थानांतरित किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात में न्यायिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और अब और देरी आम जनता के हित में नहीं होगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि गुरुग्राम जिला न्यायालय का कामकाज फिलहाल गंभीर रूप से प्रभावित है, इसलिए नए परिसर में शिफ्टिंग अपरिहार्य है। सरकार का दावा- अब पूरी तरह तैयार है भवन

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया कि ‘टावर ऑफ जस्टिस’ अब हर तरह से तैयार है और सभी लंबित निर्माण कार्य पूरे कर दिए गए हैं। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे तुरंत दूर किया जाएगा।

आग के बाद बढ़ा था संकट

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुराने गुरुग्राम कोर्ट परिसर में आग लगने और भवन के एक हिस्से के असुरक्षित घोषित होने के बाद न्यायिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में रिकॉर्ड भी आग में नष्ट हो गए थे। इसके बाद अदालतों को अस्थायी रूप से गेस्ट हाउस से संचालित किया जा रहा है, जहां केवल जरूरी मामलों की ही सुनवाई हो रही है।

जिला जज की रिपोर्ट में सामने आई थीं कमियां

हाईकोर्ट ने पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश से नए परिसर का निरीक्षण कराया था। रिपोर्ट में कई कमियां बताई गई थीं, कई जगह निर्माण कार्य अधूरा था। फर्नीचर की स्थापना नहीं हुई थी।बारिश के दौरान बेसमेंट में सीवेज का पानी भर गया था। पर्यावरण मंजूरी और फायर NOC लंबित थी। इन कमियों के बाद सरकार से जवाब मांगा गया था। फायर NOC एक-दो दिन में मिलने का दावा

सरकार ने कोर्ट को बताया कि फायर विभाग परिसर का निरीक्षण कर चुका है और कोई बड़ी कमी नहीं मिली है। आवश्यक प्रमाणपत्र एक-दो दिन में जारी होने की संभावना है। वहीं पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और भवन सभी वैधानिक मानकों का पालन करता है।
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले आदेश के पालन की रिपोर्ट हलफनामे के जरिए दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

क्या है पूरा मामला?

टावर ऑफ जस्टिस का निर्माण वर्षों से लंबित था।
पहले इसे अक्टूबर 2020 तक पूरा होना था।
देरी पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर निगरानी शुरू की।
पुराने कोर्ट परिसर में आग और भवन के असुरक्षित होने के बाद नए परिसर में शिफ्टिंग जरूरी हो गई।
अब हाईकोर्ट ने जनहित को देखते हुए तत्काल स्थानांतरण की अनुमति दे दी है।



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