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गुरुग्राम के होटल में ठहरे पंजाब अफसरों पर लटकी तलवार:पुलिस खंगालेगी कॉल और फाइनेंशियल रिकॉर्ड; फर्जी जांच रिपोर्ट कांड में जल्द खुलासा




गुरुग्राम में पंजाब के मुख्यमंत्री के वीडियो की कथित फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कराने के मामले में पंजाब के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। गुरुग्राम के फाइव स्टार क्राउन प्लाजा होटल में अधिकारियों की एंट्री के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस अब उन्हें पूछताछ के लिए जांच में शामिल करने की तैयारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों से होने वाली इस पूछताछ के बाद ही इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली दिशा तय होगी।हालांकि गुरुग्राम पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। फिलहाल, इस केस में पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके दो मुख्य आरोपियों को कोर्ट ने आठ दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। रिमांड के दौरान उनसे इस बात का पता लगाया जाएगा कि उनसे पंजाब के किन-किन अधिकारियों ने बातचीत की थी और फर्जी जांच रिपोर्ट किस तरह से तैयार की गई। पुलिस उनकी निशानदेही पर रिपोर्ट बनाने में प्रयोग किए गए सामान को भी बरामद करेगी। साथ ही इस कार्य में जिन्होंने भी इनका साथ दिया है, उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी। रिमांड के दौरान पुलिस टीम आरोपियों से रिपोर्ट कहां और कैसे तैयार की गई। इसके अलावा प्रिंट कहां से निकाले गए,लैब की ई-मेल आईडी,स्टैंप सहित अन्य जानकारी हासिल करेगी। इस फर्जी रिपोर्ट तैयार करने में कोई और शामिल है या नहीं,सभी जानकारी जुटाई जाएगी। गुरुग्राम आना इत्तेफाक या साजिश पुलिस को क्राउन प्लाजा होटल के एंट्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज से चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं है। रिकॉर्ड के मुताबिक, पंजाब पुलिस के दो बड़े अधिकारियों ने हाल ही में इस होटल में विजिट किया था और वहां ठहरे थे। इस एंट्री के बेसिस पर गुरुग्राम पुलिस ने दोनों अधिकारियों को इस नेटवर्क से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। पुलिस का मानना है कि इन अधिकारियों की मौजूदगी महज एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश हो सकती है। पूछताछ के बाद तय होगी भूमिका पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार पंजाब के इन दोनों अधिकारियों को जल्द ही औपचारिक नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा। पुलिस यह साफ करना चाहती है कि इन अधिकारियों का होटल में आने का मकसद क्या था और क्या उनका संबंध इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से है। पूछताछ के दौरान मिलने वाले जवाबों और सबूतों के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि उन्हें इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाए या नहीं। अगर उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी भी की जा सकती है। 8 दिन के रिमांड पर मुख्य आरोपी मामले में पुलिस ने अंकित और अरूण नाम के दो आरोपियों को पकड़ा गया है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करके आठ दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस रिमांड के दौरान इन आरोपियों से गहन पूछताछ की जाएगी। माना जा रहा है कि इन आरोपियों ने ही पूछताछ में पंजाब के दोनों बड़े अधिकारियों के नामों का खुलासा किया है। पुलिस अब इन आरोपियों के मोबाइल फोन डेटा, वित्तीय लेन-देन और कॉल डिटेल्स की भी जांच करेगी, ताकि अधिकारियों के साथ आरोपियों के संबंधों को पूरी तरह से डिकोड किया जा सके। कानून के जानकारों का कहना है कि यदि गुरुग्राम पुलिस के पास पर्याप्त तकनीकी और दस्तावेजी सबूत हैं, तो इन अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और उनकी गिरफ्तारी को टाला नहीं जा सकेगा।
सेफ हाउस में जसप्रीत को रखा
इस मामले में शिकायत करने वाले सिरसा के जसप्रीत की जान को खतरे को देखते हुए पुलिस बेहद सतर्कता बरत रही है। पुलिस ने सुरक्षा कारणों के चलते जसप्रीत को एक गुप्त सेफ हाउस में रखा है, जहां एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारी उससे लगातार पूछताछ कर रहे हैं। इसके अलावा गुरुग्राम पुलिस के द्वारा जसप्रीत का एक पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया था।
इस तरीके से जुड़ी कड़ियां
पंजाब सरकार के अधिकारियों के कहने पर जसप्रीत ने पंचकूला में अरूण महेंद्रू और पंकज से के बारे में जानकारी दी। जसप्रीत के बात करने के बाद अरूण ने रिपोर्ट बनाने के लिए राजी हो गया। जबकि दिल्ली के पंकज ने अंकित से बात की और अंकित भी रिपोर्ट बनाने के लिए राजी हो गया। उसके बाद दोनों से पंजाब के अधिकारियों से मिलवाया गया। दोनों को पंजाब पुलिस के अधिकारियों के द्वारा पेन ड्राइव में वीडियो दिए गए। उसके बाद दोनों ने रिपोर्ट अगले ही दिन बनाकर दी। इस काम के लिए जसप्रीत को दस लाख रुपये दिए गए। जिसमें से जसप्रीत ने एक बैंक खाते में साढ़े सात लाख और दूसरे बैंक खाते में ढ़ाई लाख रुपये जमा करवाए गए। फिर जसप्रीत ने अंकित और अरुण को तीन से चार बार में ऑनलाइन 50-50 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
गांव में दिखाया एक लैब का पता
जांच में सामने आया कि साइफर सेंटिनल लैब का पता जींद के गांव खरक गागर में एक दुकान का दिखाया गया। सेंटिनल लैब की रिपोर्ट अंकित के द्वारा तैयार की गई थी, सभी पेज पर अंकित के द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। अंकित के द्वारा वीडियो की रिपोर्ट नौ पेज की तैयार की गई। इस रिपोर्ट में वीडियो के 1191 फ्रेम निकाल कर जांच करने का दावा किया गया था। दूसरी लैब उत्तम नगर में जबकि अरूण महेंद्रू के द्वारा दिल्ली के उत्तम नगर के पते पर साइबरयान लैब का पता दिखाया गया। इस लैब के नाम से 13 पेज की यह रिपोर्ट अरूण के द्वारा तैयार की गई थी। रिपोर्ट में वीडियो के 1191 फ्रेम निकाल कर रिपोर्ट को तैयार किया गया। गुरुग्राम पुलिस के द्वारा दोनों पते की जांच की गई,तो सामने आया कि इस नाम से कोई लैब नहीं है। दोनों रिपोर्ट सही लगे इसके लिए रिपोर्ट के पहले पेज पर पता,मोबाइल नंबर,ई-मेल आईडी और वेबसाइट भी लिखी हुई थी,ताकि फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आए। रिपोर्ट में हस्ताक्षर करने के साथ-साथ स्टैंप भी लगाई हुई थी। हालांकि इस संबंध में गुरुग्राम पुलिस के अधिकारी बात करने से बच रहे हैं। एसीपी क्राइम नवीन कुमार से बात की गई, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे अभी बिजी है, बाद में बात करेंगे।



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