गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) के वडोदरा शहर अध्यक्ष अशोक ओझा ने अपनी गिरफ्तारी पर बड़ा खुलासा करते हुए पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने साफ किया कि उनके खिलाफ बनाई गई पूरी कहानी मनगढ़ंत है। फोन कॉल के विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने आईबी (IB) को फोन सिर्फ यह पूछने के लिए किया था कि “आपको क्या आवश्यकता है।” इस कॉन्फ्रेंस कॉल में उनके पार्टी पदाधिकारी केशव चौहान भी शामिल थे। ओझा ने दृढ़ता से कहा कि उन्होंने किसी को भी आईबी बनकर फोन करने के लिए नहीं कहा था, बल्कि उन्हें एक झूठे केस में फंसाने की साजिश रची जा रही है। पूछताछ के बहाने पार्टी फंड की टटोल अशोक ओझा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें एक कमरे में ले जाया गया, जहां खुद को पीआई (पुलिस इंस्पेक्टर) बताने वाली एक ‘परमार मैडम’ ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की। ओझा के अनुसार, वह महिला उन्हें किसी भी एंगल से पीआई नहीं लग रही थीं। उस दौरान पुलिस ने केस से जुड़ी कोई बात करने के बजाय सिर्फ और सिर्फ आम आदमी पार्टी के पुराने व नए संगठन के बारे में सवाल किए। उनसे पूछा गया कि गुजरात और वडोदरा में पार्टी का फंड कहाँ से आता है और पिछले दिनों (24 से 26 तारीख तक) अरविंद केजरीवाल के रुकने का खर्च कहाँ से आया था। दबाव में वीडियो बनवाने का आरोप और गृहमंत्री से सवाल अशोक ओझा ने गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी पर सीधा निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या वे लोगों को डरा-धमकाकर और झूठे केस दर्ज करके राजनीति करना चाहते हैं? उन्होंने खुलासा किया कि 20 पुलिसवालों के दबाव के बीच उनका एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया। उस वीडियो में जब भी वे अनजाने में “साहब” बोल देते थे, तो वीडियो को चार बार रिजेक्ट करके दोबारा बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आम आदमी पार्टी के वफादार सिपाही हैं और रहेंगे। पुलिस की इस कार्रवाई का एकमात्र मकसद उनकी पार्टी की आंतरिक राजनीति और फंड की जानकारी निकालना था।
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