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भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब सरकार की ओर से रणजीत एवेन्यू के दशहरा ग्राउंड में श्री गुरु रविदास महाराज जी के प्रकाशोत्सव को समर्पित कीर्तन दरबार सजाया गया। शाम 5 से साढ़े 8 बजे तक चले समागम में हजारों की संख्या में संगत के पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन पंडाल में संगत की कमी साफ खलती रही। संगत न जुटने का मुख्य कारण जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। प्रशासन ने दो दिन पहले 1 जुलाई को शहर की श्री गुरु रविदास सभा सोसायटियों के साथ बैठक कर 3 जुलाई के कार्यक्रम की जानकारी दी थी। इतने कम समय में सूचना मिलने के कारण समाज के अधिकांश लोग और श्रद्धालु इस बड़े कीर्तन दरबार में शामिल नहीं हो सके। कीर्तन दरबार में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह लेट पहुंचे। साढ़े 8 बजे अरदास करके भोग डाले गए। इ सके बाद कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह पहुंचे। इससे पहले श्री सुखमणि साहिब जी के पाठ किए गए। वहीं बाबा कश्मीर सिंह जी भूरी वालों और बाबा सुखविंदर सिंह जी भूरी वालों ने इस सेवा में भाग लिया। श्री सुखमणि साहिब का पाठ शाम 4 से 6 बजे तक हुए। इ सकी सेवा भाई प्रितपाल सिंह, भाई बलबीर सिंह, एकम-जोत सिंह और महक जीत सिंह समेत अन्य सेवादारों ने निभाई। वही फ्री मेडिकल चेकअप और खूनदान कैंप भी लगाए गए। जिला प्रशासन की ओर से लंगर लगाया गया। इस मौके पर विधायक डॉ. जसवीर सिंह संधू, विधायक डॉ. इंदरबीर निज्जर, जतिंदर सिंह मोती भाटिया, विधायक जीवनजोत कौर और लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह, समेत कई नेता विशेष रूप से पहुंचे। खूनदान कैंप में पुलिस की महिला कर्मियों सहित 13 लोगों ने अपना खूनदान किया। कीर्तन दरबार में रागी जत्थे में भाई हरदियाल सिंह गुरुद्वारा शहीदां साहिब साहब, भाई जबर कोट सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहिब ने गुरु जस गाकर संगत को निहाल किया। कीर्तन दरबार में जिला प्रशासन की तरफ से लंगर की अच्छी व्यवस्था थी। परंतु कीर्तन दरबार के समाप्ति के तुरंत बाद लंगर लगाया गया, जिसमें संगत को लंगर लेने के लिए लाइनों में खड़े होना पड़ा। संगत ने लंगर लेने के बाद पंगत में बैठकर ग्रहण किया। कीर्तन दरबार में एडीसी विकास सुरिंदर सिंह, रविंदर हंस, मास्टर सोमराज फगवाड़ा, अमर प्रकाश कथूरिया, प्रोफेसर रवि शंकर, गिरधारी लाल, बनारसी लाल कथूरिया, सूरज प्रकाश, कुलवंत राय, सिमरन राजपूत, राम जी मास्टर रामलाल आदि मौजूद रहे। कीर्तन दरबार के दौरान संत समाज के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
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कीर्तन दरबार में रागी जत्थों ने गाया गुरु यश, मुलाजिमों ने किया महादान







