करनाल के उचानी स्थित पशुपालन विश्वविद्यालय के एक यूनिट में कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई अंशदान में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि ठेकेदार फर्म ने कर्मचारियों की सैलरी से कटौती तो की, लेकिन रकम संबंधित विभाग में जमा नहीं करवाई। इसके बजाय फर्जी चालान लगाकर यूनिवर्सिटी को गुमराह किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लवण्या एंटरप्राइजेज को दिया गया था ठेका
मामले में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के तहत आने वाले एचपीवीके, उचानी (करनाल) यूनिट की ओर से शिकायत दी गई है। शिकायत में बताया गया कि एम/एस लवण्या एंटरप्राइजेज, अशोक विहार, आजाद नगर, हिसार को 1 अगस्त 2018 से 30 जून 2019 तक आउटसोर्सिंग के तहत मैनपावर उपलब्ध कराने का ठेका दिया गया था। यह ठेका रजिस्ट्रार लुवास द्वारा 30 जुलाई 2018 को जारी आदेश के तहत दिया गया था। बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस फर्म का अनुबंध समय-समय पर बढ़ाते हुए 31 मई 2021 तक जारी रखा। सैलरी से कटौती, जमा नहीं करवाई राशि
शिकायत के अनुसार फर्म ने एचपीवीके उचानी में तैनात कर्मचारियों की सैलरी से पीएफ और ईएसआई अंशदान की कटौती की। साथ ही यूनिवर्सिटी को दिए गए हर बिल के साथ यह प्रमाणित किया कि संबंधित राशि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और ईएसआई विभाग में जमा करवा दी गई है।लेकिन बाद में कर्मचारियों की शिकायतों और जांच में सामने आया कि फर्म ने अधिकांश मामलों में यह राशि जमा ही नहीं करवाई। फर्जी चालान देकर किया बड़ा खेल
जांच के दौरान जब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो सामने आया कि फर्म द्वारा दिए गए चालान फर्जी और जाली थे। केवल कुछ महीनों की ही राशि जमा करवाई गई थी, जबकि बाकी समय के लिए कोई जमा नहीं मिली। इस खुलासे के बाद मामले को गंभीर मानते हुए यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित विभागों को भी इसकी जानकारी दी गई। बैंक गारंटी जब्त, फिर भी नहीं दिया जवाब
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए लवण्या एंटरप्राइजेज द्वारा जमा करवाई गई बैंक गारंटी को जब्त कर लिया। इसके अलावा फर्म को कई बार ईमेल और रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से नोटिस भेजे गए, लेकिन फर्म ने किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया। फर्म के दिए गए पते पर भेजे गए रजिस्टर्ड पत्र भी वापस लौट आए, जिससे संदेह और गहरा गया। 23 कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी
इस पूरे मामले में एचपीवीके उचानी में तैनात 23 कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई अंशदान में गड़बड़ी सामने आई है। फर्म द्वारा इन कर्मचारियों के पैसे का गबन करने और खुद लाभ उठाने का आरोप है। यूनिवर्सिटी की ओर से इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए पुलिस में शिकायत दी गई, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्वासघात और कर्मचारियों के हक की राशि हड़पने की बात कही गई है। थाना सदर करनाल में केस दर्ज
इस संबंध में थाना सदर करनाल में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार डॉ. अनीता गांगुली, रीजनल डायरेक्टर एचपीवीके उचानी, करनाल की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर एम/एस लवण्या एंटरप्राइजेज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर जसविंद्र को सौंपी गई है। थाना प्रभारी तरसेम चंद ने बताया कि मामले में प्रारंभिक जांच के बाद धोखाधड़ी और गबन के आरोपों को देखते हुए केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है। यूनिवर्सिटी की ओर से पुलिस को ठेके से जुड़े सभी दस्तावेज, बिलों की कॉपी, फर्जी चालान, कर्मचारियों की शिकायतें, पत्राचार रिकॉर्ड और कर्मचारियों की सूची उपलब्ध करवाई गई है। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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करनाल में कर्मचारियों के पीएफ-ईएसआई में घोटाला:फर्जी चालान लगाकर यूनिवर्सिटी से वसूले बिल, 23 कर्मचारियों के साथ हुई ठगी
