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अविश्वास प्रस्ताव के बाद फूटा सोहन राणा का गुस्सा:बोले- षड्यंत्र से हटाया गया, षड्यंत्रकारियों को बताया कालनेमि,कांग्रेस समर्थित पार्षदों और पार्टी के ही कुछ नेताओं पर आरोप




करनाल जिला परिषद चेयरपर्सन प्रवेश राणा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद उनके प्रतिनिधि सोहन सिंह राणा ने मीडिया के सामने आकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया, जिसमें कांग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ-साथ उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेताओं की भी भूमिका रही। सोहन राणा ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी ईमानदारी से काम किया और भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया, जिससे कुछ लोग नाराज हो गए। ईमानदारी से काम किया, इसलिए विरोध हुआ
सोहन सिंह राणा ने कहा कि जिस दिन से उन्होंने चेयरमैन का कार्यभार संभाला, उसी दिन से उन्होंने साफ नीयत से काम किया। उन्होंने दावा किया कि जिला परिषद में एक भी पैसे का भ्रष्टाचार नहीं होने दिया। उनका कहना था कि कुछ लोगों को “मलाई खाने” की आदत थी, लेकिन उनके सख्त रवैये के कारण ऐसे लोगों के हित प्रभावित हुए और वे उनके खिलाफ हो गए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को छोटी-मोटी कमाई की आदत थी, जिसे उन्होंने पूरी तरह बंद कर दिया। इसी कारण नाराज लोगों ने मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची और अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें हटाने में कामयाब हो गए। कांग्रेस समर्थित पार्षदों पर लगाया आरोप
सोहन राणा ने सीधे तौर पर कांग्रेस समर्थित पार्षदों को इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने वाइस चेयरमैन रीना खरकाली के पति धीरज खरकाली को आगे कर साजिश को अंजाम दिया। उनके मुताबिक, धीरज खरकाली को “इंजन” बनाकर पूरा खेल रचा गया। हालांकि उन्होंने फ्लोर टेस्ट के नतीजे को स्वीकार करते हुए कहा कि वे इस फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सभी सदस्यों को बधाई, जो इस षड्यंत्र में सफल हो गए। पार्टी के नेताओं पर भी साधा निशाना
सोहन सिंह राणा ने अपनी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा बधाई वे उन्हीं नेताओं को देना चाहते हैं, जिन्होंने पार्टी में रहते हुए उनके खिलाफ साजिश रची। उन्होंने कहा कि 17 पार्षदों का अचानक उनके खिलाफ हो जाना सामान्य बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे “बहुत बड़ा खेल” है। उनके अनुसार, पैसे और लालच के चलते लोगों का ईमान डगमगा गया और इसी कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने ऐसे नेताओं को “कालनेमि” की संज्ञा देते हुए कहा कि ये लोग पार्टी के अंदर रहकर ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। विधायकों की नाराजगी पर भी दी सफाई
पांचों विधायकों की कथित नाराजगी के सवाल पर सोहन राणा ने कहा कि उन्होंने चुनाव के दौरान दिन-रात मेहनत की और पूरी निष्ठा से सभी विधायकों के लिए काम किया। उन्हें समझ नहीं आता कि आखिर वे किस बात से नाराज थे।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि उसके अलावा कोई और आगे नहीं बढ़े, तो यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वे भी पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और उन्हें कोई दबा नहीं सकता। शीर्ष नेतृत्व के सामने रखेंगे मामला
सोहन सिंह राणा ने कहा कि वे इस पूरे मामले को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखेंगे। उन्होंने बताया कि वे प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के सामने अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा वे अपने समाज के लोगों के बीच भी जाएंगे और उनसे पूछेंगे कि आखिर उनका कसूर क्या था, जिसके लिए उन्हें यह सजा मिली। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने गद्दारी की है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। राजपूत समाज का मुद्दा भी उठाया
सोहन राणा ने कहा कि पूरे हरियाणा में वे ही एकमात्र राजपूत समाज से चेयरमैन थे। उन्होंने कहा कि राजपूत समाज भाजपा को पूरा समर्थन देता है, लेकिन उनके साथ ही इस तरह का व्यवहार किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी भी जातिवाद नहीं किया और हमेशा सभी 36 बिरादरी के लिए समान रूप से काम किया। उनके अनुसार, उन्होंने हर वार्ड में बराबर विकास कार्य करवाने की कोशिश की, लेकिन कुछ लोगों ने लगातार बाधाएं डालीं। ग्रांट वितरण पर आरोपों का खंडन
जाति के आधार पर ग्रांट बांटने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सोहन राणा ने कहा कि उनके कार्यकाल में हुए सभी विकास कार्यों की सूची निकाली जा सकती है। उन्होंने चुनौती दी कि कोई भी व्यक्ति इस सूची को देखकर बता सकता है कि किस वार्ड में कितना काम हुआ। उन्होंने धीरज खरकाली को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि वे प्रमाण के साथ आरोप साबित करें। उनका कहना था कि झूठ बोलने वाला कभी सफल नहीं होता और जो खुशी आज कुछ लोगों को मिल रही है, वह ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। ‘जयचंद’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल
सोहन सिंह राणा ने अपने विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाज में पहले भी “जयचंद” जैसे लोग हुए हैं, जिन्होंने दगा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का इतिहास में कोई नाम नहीं होता, जबकि नाम उन्हीं का होता है जो समाज और देश के लिए संघर्ष करते हैं।
उन्होंने कहा कि गद्दार लोगों का न तो नाम लेना चाहिए और न ही उनकी चर्चा करनी चाहिए। 25 जुलाई को समाज की बैठक, आगे की रणनीति तय होगी
सोहन राणा ने बताया कि इस घटनाक्रम के बाद उन्हें लगातार फोन कॉल आ रहे हैं। इसी के चलते 25 जुलाई को करनाल की राजपूत धर्मशाला में एक बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक में समाज जो भी निर्णय लेगा, वे उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय करेंगे।



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