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अमृतसर में FIR-नंबर 91 से एडवोकेट बिक्रमजीत बाठ हुए बेगुनाह:फैसले के बाद वकील समुदाय में खुशी की लहर; वकील बोले-न्याय की जीत हुई




अमृतसर में हुई एफआईआर नंबर 91 में नामजद किए गए एडवोकेट बिक्रमजीत सिंह बाठ को जांच के बाद बेगुनाह मान लिया गया है। इस फैसले के बाद वकील समुदाय में खुशी की लहर है और इसे वकीलों की एकजुटता की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल के एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह मामला पहले दर्ज हुई एफआईआर नंबर 90 से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि अकाली कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को पुलिस ने कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया था। बाद में हाईकोर्ट ने भी उसकी गिरफ्तारी को अवैध माना था। सियाली के अनुसार, एडवोकेट बिक्रमजीत सिंह बाठ अपने मुवक्किल जोबनप्रीत सिंह के पिता के साथ पुलिस थाने पहुंचे थे ताकि गिरफ्तारी और दर्ज मामले के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सके। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो में साफ दिखाई देता है कि बाठ शांतिपूर्वक थाने पहुंचे थे और केवल अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। राजनीतिक दबाव में फंसाने के आरोप इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर नंबर 91 में उनका नाम शामिल कर लिया। इस कार्रवाई के विरोध में अमृतसर बार एसोसिएशन सहित कई वकील संगठनों ने प्रदर्शन और हड़ताल की। वकील समुदाय का आरोप था कि राजनीतिक दबाव के चलते एक अधिवक्ता को मामले में फंसाने की कोशिश की गई। मामले ने तूल पकड़ने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी हस्तक्षेप किया। काउंसिल की ओर से प्रशासन को पत्र भेजकर मांग की गई कि किसी भी वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले संबंधित बार एसोसिएशन से उचित सलाह-मशविरा किया जाए। जांच में जरूरत न होने की बात स्वीकार एडवोकेट बिक्रमजीत सिंह बाठ की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने अदालत में स्पष्ट किया कि बाठ केवल एक वकील के रूप में अपनी पेशेवर ड्यूटी निभाने के लिए पुलिस थाने गए थे और जांच में उनकी आवश्यकता नहीं है। इसके बाद उन्हें एफआईआर नंबर 91 में बेगुनाह मान लिया गया और उनकी जमानत याचिका का निपटारा कर दिया गया। बिक्रमजीत सिंह बाठ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे वकील समुदाय की जीत है। उन्होंने विभिन्न बार एसोसिएशनों और वकीलों का धन्यवाद करते हुए कहा कि एकजुटता के कारण सच्चाई सामने आई और न्याय की जीत हुई।



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