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Youth Quits PGI Job, Addicted to Zombie Drug, Viral Video


चंडीगढ़ में सड़क किनारे करीब एक घंटे तक ‘स्टैच्यू’ बन बैठे युवक का वीडियो सामने आने के बाद दैनिक भास्कर ने उसे ढूंढ निकाला और उसकी आपबीती जानी। युवक ने बताया कि वह करीब दो महीने से कथित “जॉम्बी ड्रग” की चपेट में है, जहां दोस्तों ने ही उसे इस नशे में ध

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उसने कहा कि पहले हेरोइन लेते थे, लेकिन अब इंजेक्शन के जरिए लिए जाने वाले इस खतरनाक नशे का आदी हो चुका है, जिसके असर से शरीर सुन्न पड़ जाता है और इंसान घंटों तक एक ही पोजीशन में जड़ हो जाता है।

PGI में सफाई कर्मी की नौकरी छूटने के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। इलाज और काउंसलिंग के बावजूद वह दोबारा नशे में लौट गया। जानिए कौन है युवक, कैसे नशे की लत में फंसा…युवक की जुबानी, पूरी कहानी…

युवक बोला- दोस्तों ने ही इस नशे की तरफ लगाया, जिसके बाद वह इसकी लत में फंस गया।

युवक बोला- दोस्तों ने ही इस नशे की तरफ लगाया, जिसके बाद वह इसकी लत में फंस गया।

ये बताईं ये बड़ी बातें…

  • दोस्तों ने नशे की लत में फंसाया: सेक्टर-25 में नशे की हालत में मिले अजय ने होश में आने के बाद अपने बारे में बताया। उसने कहा कि वह करीब दो महीने पहले इस तथाकथित जॉम्बी ड्रग के नशे में आया। उसके दोस्तों ने ही उसे इस नशे की तरफ लगाया, जिसके बाद वह इसकी लत में फंस गया।
  • पहले हेरोइन लेता था, अब जॉम्बी ड्रग: अजय ने कहा कि इससे पहले वह हेरोइन का नशा करता था, लेकिन बाद में उसने यह ज्यादा खतरनाक नशा शुरू कर दिया। इस नशे का असर बेहद खतरनाक होता है। उसने बताया कि इसे लेने के बाद इंसान का शरीर सुन्न हो जाता है और कई बार वह जिस पोजीशन में होता है, उसी में लंबे समय तक जड़ हो जाता है।
  • इंजेक्शन के जरिए नस में लगाया जाता: अजय ने कहा कि अगर कोई खड़ा है, तो खड़ा ही रह जाता है और अगर बैठा है, तो उसी तरह बैठा रहता है, शरीर में किसी तरह की हलचल नहीं होती। अजय ने यह भी दावा किया कि यह नशा इंजेक्शन के जरिए नस में लगाया जाता है।
  • ड्रग मिलने वाली जगहों के नाम भी बताए: अजय ने कहा कि यह ड्रग सेक्टर 38-ए, डड्डूमाजरा कॉलोनी की चार मंजिला इमारतों में और मलोया में मिलता है, जहां से उसके दोस्त इसे लेकर आते थे। हालांकि अजय के बाता जॉम्बी ड्रग के क्षेत्रों की पुष्टि दैनिक भास्कर नहीं करता है।

अजय के भाई ने ये बातें बताईं…

  • अजय परिवार में सबसे छोटा भाई: अजय के बड़े भाई कुलदीप ने कहा कि उनके परिवार में तीन भाई-बहन हैं। वह सबसे बड़े हैं और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं। उनकी छोटी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि सबसे छोटा भाई अजय है, जो पिछले कुछ समय से नशे की लत में फंस गया है।
  • खबरों के जरिए परिवार को पता चला: कुलदीप ने बताया कि उन्हें अपने भाई की इस हालत के बारे में सीधे तौर पर कोई जानकारी नहीं थी। दो दिन पहले जब यह खबर मीडिया में सामने आई और सेक्टर-25 में कुछ युवकों के जॉम्बी जैसी हालत में दिखने की बात चली, तब उन्होंने वीडियो और तस्वीरें देखकर अपने भाई को पहचाना। इसके बाद उन्हें पता चला कि अजय भी उन्हीं युवकों में शामिल था, जो नशे की हालत में सड़क किनारे बेसुध बैठा हुआ दिखाई दिया।
  • 7वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी, गलत संगत में पड़ा: उन्होंने कहा कि अजय पिछले कुछ समय से घर से दूर रह रहा था और घर नहीं आ रहा था, जिससे परिवार पहले ही परेशान था। धीरे-धीरे उसका संपर्क भी कम होता गया। अजय ने 7वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और उसके बाद वह कोई स्थायी काम नहीं कर पाया, जिससे वह गलत संगत में पड़ गया और धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में आ गया।
  • पीजीआई में सफाई कर्मचारी की नौकरी की: कुलदीप ने बताया कि साल 2017 में उन्होंने अपने छोटे भाई अजय को पीजीआई में सफाई कर्मचारी के तौर पर लगवाया था। मैं खुद भी वहीं काम करता हूं, इसलिए उन्होंने सोचा कि भाई को नौकरी मिल जाएगी तो उसका भविष्य संभल जाएगा और वह गलत रास्तों से दूर रहेगा।
  • काम में लापरवाही करने लगा, घर से दूरी बना ली: उन्होंने कहा कि शुरुआत में अजय ने ठीक से काम किया और करीब 7 साल तक लगातार पीजीआई में ड्यूटी करता रहा। इस दौरान परिवार को भी उम्मीद थी कि अब उसकी जिंदगी पटरी पर आ गई है। लेकिन धीरे-धीरे उसका व्यवहार बदलने लगा। वह काम में लापरवाही करने लगा और घर से भी दूरी बनाने लगा।
  • एक साल पहले नौकरी छोड़ दी: कुलदीप के अनुसार, साल 2025 में अजय ने अचानक नौकरी छोड़ दी। इसके बाद ही उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उसी दौरान उसे नशे की लत लग गई। पहले परिवार को इसकी पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन समय के साथ यह साफ हो गया कि वह गंभीर रूप से नशे की चपेट में आ चुका है, जिसने उसकी नौकरी और सामान्य जिंदगी दोनों को प्रभावित कर दिया।
  • व्यवहार में बदलाव देखकर शक हुआ: कुलदीप ने कहा कि परिवार को शुरुआत में ही अजय के व्यवहार में बदलाव देखकर शक होने लगा था कि वह किसी नशे की चपेट में आ गया है। जब भी अजय घर आता था तो उसकी चाल-ढाल और बोलने का तरीका सामान्य नहीं होता था। वह सुस्त और बेसुध सा रहता था, कई बार ठीक से बात भी नहीं कर पाता था, जिससे साफ लगता था कि वह किसी नशे के असर में है।
  • समझ नहीं आया कि वह कौन सा नशा करता: उन्होंने कहा कि परिवार को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह कौन सा नशा कर रहा है, क्योंकि उसके मुंह से शराब जैसी कोई बदबू नहीं आती थी। इसी वजह से शुरुआत में उन्हें शक तो हुआ, लेकिन वे पूरी तरह से स्थिति को समझ नहीं पाए।
  • सफेद रंग का कोई पदार्थ लेते हुए भी देखा: कुलदीप ने बताया कि कई बार उन्होंने अजय को मुंह के जरिए सफेद रंग का कोई पदार्थ लेते हुए भी देखा। वह छुपकर इसे इस्तेमाल करता था और परिवार से दूरी बनाने लगा था, जिससे उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और मुश्किल हो गया। इन सब बातों से परिवार को यकीन हो गया कि वह किसी गंभीर नशे की लत में फंस चुका है, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।
  • डॉक्टरों ने उसकी काउंसलिंग भी की: कुलदीप ने कहा कि परिवार ने जब अजय की हालत बिगड़ती देखी तो उसे इलाज के लिए पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र लेकर गए। वहां उसका रजिस्ट्रेशन कराया गया और इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई। डॉक्टरों ने उसकी काउंसलिंग की और शुरुआती इलाज के तौर पर उसे 15 दिन की दवाइयां दीं। इस दौरान परिवार को कुछ राहत मिली, क्योंकि दवा लेने के बाद अजय कुछ दिनों तक सामान्य रहा और उसने नशा भी नहीं किया।
  • दवाइयां खत्म होने पर फिर नशा करने लगा: उन्होंने कहा कि यह सुधार ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। दवाइयों का कोर्स पूरा होने के बाद अजय ने फिर से नशा करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह दोबारा उसी लत में फंस गया और उसने नशा मुक्ति केंद्र जाना भी बंद कर दिया। परिवार ने उसे समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह इलाज जारी रखने के लिए तैयार नहीं हुआ।
  • डॉक्टरों ने कहा था- इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहा: कुलदीप ने बताया कि जब उन्होंने डॉक्टर से दोबारा बात की, तो उन्हें पता चला कि इलाज के दौरान अजय ने खुद स्वीकार किया था कि वह अब पहले से ज्यादा खतरनाक तरीके से नशा करने लगा है। डॉक्टर के अनुसार, उसने बताया था कि वह इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहा है, जो सेहत के लिए और भी ज्यादा नुकसानदेह होता है।
  • पहले भी सिर झुकाकर घंटों पड़ा रहता था: कुलदीप ने कहा कि अजय की यह हालत कोई पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी कई बार उसे इसी तरह एक ही पोजीशन में लंबे समय तक बैठे या खड़े देखा गया है। कई बार वह सड़क किनारे या किसी कोने में सिर झुकाकर घंटों तक बिना किसी हरकत के पड़ा रहता था, जैसे उसे आसपास की कोई भी चीज़ का होश ही न हो। उसकी आंखें आधी बंद रहती थीं और शरीर बिल्कुल सुस्त पड़ जाता था। उन्होंने बताया कि कई बार उसे आवाज लगाने या हिलाने पर भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिलती थी। ऐसा लगता था जैसे वह पूरी तरह नशे के असर में डूबा हुआ है और अपने शरीर पर उसका कोई कंट्रोल नहीं है। इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, लेकिन इस बार मामला सामने आने के बाद परिवार ने खुलकर अपनी बात रखी है।

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चंडीगढ़ में युवक एक घंटे तक रोड के किनारे एक ही तरह से बैठा रहा। युवक का सिर झुका हुआ था और शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसके हाथ में बीड़ी थी लेकिन वह उसे पी नहीं पा रहा था। लोगों ने उससे बात करने की भी कोशिश की लेकिन वह हिल तक नहीं पाया। इसे जॉम्बी ड्रग के असर से जोड़कर देखा जा रहा है। (पढ़ें पूरी खबर)



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