चंडीगढ़ में फर्जी प्रोफाइल बनाकर बिजनेसमैन से 1.96 करोड़ की ठगी।
चंडीगढ़ में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जहां मनीमाजरा के एक कारोबारी से 1. 96 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। आरोपियों ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) की फोटो लगाकर वॉट्सएप पर फर्जी प्रोफाइल बनाई और अकाउंटेंट को मैसेज भेजकर रकम ट्रांसफर करवा
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फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बना भेजा मैसेज
मनीमाजरा निवासी कारोबारी संजीव अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी में रंजन जैन मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि नेहा अकाउंटेंट के तौर पर कंपनी के वित्तीय लेनदेन संभालती हैं।घटना के दौरान आरोपियों ने रंजन जैन की फोटो का इस्तेमाल करते हुए वॉट्सएप पर उनकी फर्जी प्रोफाइल तैयार की।
इसके बाद उसी नंबर से अकाउंटेंट नेहा को मैसेज भेजा गया, जिसमें खुद को मैनेजिंग डायरेक्टर बताते हुए तत्काल 1.96 करोड़ रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। मैसेज का अंदाज और भाषा भी इस तरह रखी गई थी कि वह पूरी तरह असली लगे।
पहले भी किए थे कई बार ट्रांजेक्शन
शिकायत में यह भी बताया गया कि कंपनी में पहले भी मैनेजिंग डायरेक्टर के निर्देश पर बड़े-बड़े ट्रांजेक्शन किए जाते रहे हैं, इसलिए अकाउंटेंट को इस मैसेज पर कोई संदेह नहीं हुआ। उसने इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा समझते हुए बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। आरोपियों ने इसी भरोसे और सिस्टम की जानकारी का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दिया, जिससे साफ है कि उन्होंने पहले से पूरी योजना बनाकर कंपनी की कार्यप्रणाली को समझा और उसी के आधार पर वारदात की।
इंडसइंड बैंक के खाते में ट्रांसफर किए पैसे मैसेज पर भरोसा करते हुए अकाउंटेंट नेहा ने बिना देर किए बताए गए इंडसइंड बैंक के खाते में 1 करोड़ 96 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। चूंकि मैसेज मैनेजिंग डायरेक्टर के नाम और फोटो से आया था और कंपनी में पहले भी इस तरह के निर्देश मिलते रहे थे, इसलिए उसने इसे सामान्य प्रक्रिया मानते हुए तुरंत भुगतान कर दिया।
ट्रांजेक्शन पूरा होने के कुछ समय बाद नेहा ने इसकी जानकारी कंपनी के मालिक संजीव अग्रवाल को दी। इसके बाद जब संजीव अग्रवाल ने मैनेजिंग डायरेक्टर रंजन जैन से इस बारे में पुष्टि की, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने न तो ऐसा कोई मैसेज भेजा है और न ही किसी तरह का भुगतान करने के लिए कहा है।
साइबर ठगी।
बैंक पहुंचे, लेकिन पैसे पहले ही निकल चुके थे ठगी का पता चलते ही संजीव अग्रवाल बिना देर किए संबंधित बैंक शाखा पहुंचे और ट्रांजेक्शन को तुरंत रुकवाने की कोशिश की। उन्होंने बैंक अधिकारियों को पूरी जानकारी देते हुए रकम होल्ड करने और आगे ट्रांसफर रोकने का अनुरोध किया।
हालांकि, बैंक अधिकारियों ने जांच के बाद बताया कि पैसे पहले ही संबंधित खाते में ट्रांसफर हो चुके हैं और वहां से भी आगे अन्य खातों में भेज दिए गए हैं। ऐसे मामलों में रकम बहुत तेजी से अलग-अलग खातों में घुमाई जाती है, जिससे उसे तुरंत ट्रेस या रोक पाना मुश्किल हो जाता है।
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया तुरंत होती है पूरी
बैंक की ओर से यह भी बताया गया कि ट्रांजेक्शन ऑनलाइन होने के कारण प्रक्रिया तुरंत पूरी हो जाती है, इसलिए समय रहते जानकारी न मिलने पर रकम को रोकना संभव नहीं हो पाता। इसके बाद संजीव अग्रवाल को सलाह दी गई कि वे तुरंत साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
