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Punjab Congress Charanjit Channi Vs Bhupesh Bhaghel Raja Warring Rahul Gandhi


पंजाब कांग्रेस में टूट का खतरा थमा नहीं है। 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कैंपेन कमेटी के चेयरमैन बनाए चरणजीत चन्नी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। चन्नी ने कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर ही पार्टी का प्रचार कर लेंगे। इस बारे में चन्न

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वहीं कांग्रेस हाईकमान से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से हाईकमान नाराज है। उन्हें पंजाब में कांग्रेस की गुटबाजी खत्म करने के लिए भेजा गया था। इसके लिए पूरे 5 दिन का टाइम दिया गया था लेकिन गुटबाजी कम करने के बजाय वह इसे और हवा दे गए। चन्नी गुट में प्रताप बाजवा, सुखजिंदर रंधावा और प्रगट सिंह जैसे बड़े चेहरे होने के बावजूद बघेल ने उन्हें सीरियसली नहीं लिया।

दरअसल, एक तो बघेल ने 4 दिन सिर्फ प्रधान राजा वड़िंग के गुट के साथ ही मुलाकात में निकाल दिए। 4 दिन तक उन्होंने 9 MLA व 3 सांसदों के समर्थन वाले चन्नी गुट की परवाह नहीं की। फिर आखिरी दिन वे मिले भी तो चन्नी और वड़िंग गुट की एक साथ मीटिंग नहीं करा सके। न ही दोनों पक्षों को एक मंच पर ला सके। इसके उलट चन्नी गुट से मिलने के बाद बघेल राजा वड़िंग के साथ डिफेंडर में सवार होकर निकले तो चन्नी गुट के जख्मों पर और नमक छिड़क दिया गया।

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग के साथ डिफेंडर गाड़ी में एयरपोर्ट पहुंचे।

गुटबाजी बढ़ी तो बघेल पर भी लटक सकती है तलवार 2021 में इसी तरह हरीश रावत से पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी छिनी थी। उनकी रिपोर्ट पर कांग्रेस हाईकमान ने चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम कुर्सी से हटाया था। इसके बाद चन्नी मुख्यमंत्री बन गए लेकिन इसके तुरंत बाद नवजोत सिद्धू ने पंजाब प्रधान रहते अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। जिसके बाद हाईकमान ने हरीश रावत की जगह हरीश चौधरी को प्रभारी बनाकर भेजा।

इसके बावजूद कांग्रेस को इस बगावत का खामियाजा भुगतना पड़ा था। 2017 में 77 सीटें जीतकर सत्ता में आई कांग्रेस 2022 में सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई। वहीं AAP ने लैंडस्लाइड विक्ट्री दर्ज करते हुए 117 में से 92 सीटें जीत लीं थी। ऐसे में माना जा रहा है कि पंजाब में क्लेश बढ़ता रहा तो फिर बघेल की भी कुर्सी छिन सकती है।

चंडीगढ़ में शनिवार को राणा गुरजीत के घर मीटिंग हुई। इसमें AICC प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बैठे चन्नी और रंधावा।

चन्नी गुट पहले ही विरोध जता चुका चरणजीत चन्नी का गुट पहले ही बघेल का विरोध कर चुका है। उनका कहना है कि बघेल ने हाईकमान को पंजाब की स्थिति के बारे में गुमराह किया। उन्हें सही रिपोर्ट नहीं दी, जिसकी वजह से राजा वड़िंग की प्रधानगी बरकरार रही। वहीं कल हुई मीटिंग में भी जालंधर कैंट से MLA प्रगट सिंह ने बघेल के सामने ही उनके इंटरव्यू और उसमें कही जा रही बातों को लेकर कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने इशारों में कहा कि इस तरह चेतावनी देने के बजाय बघेल को पार्टी को एकजुट करने पर ध्यान देना चाहिए।

अब जानिए, अब तक के हालात से किसे क्या मिला:-

वड़िंग को क्या मिला: कुर्सी बची, लेकिन परीक्षा अभी बाकी पिछले एक सप्ताह से प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी रही। इसके बावजूद हाईकमान ने 23 जिला अध्यक्ष राजा वड़िंग के गुट के होने की वजह से नेतृत्व परिवर्तन से इनकार कर दिया। इससे राजा वड़िंग को तत्काल राहत मिली और उनका संगठनात्मक अधिकार बरकरार रहा।

हालांकि, इस विवाद ने यह भी दिखा दिया कि पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर सवाल मौजूद हैं। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना और यह साबित करना होगी कि मौजूदा नेतृत्व में कांग्रेस 2027 का चुनाव मजबूती से लड़ सकती है।

चन्नी को क्या मिला: बात सुनी गई, राजनीतिक वजन भी दिखा पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी नेतृत्व परिवर्तन नहीं करा सके, लेकिन यह जरूर साबित कर दिया कि उन्हें नजरअंदाज करना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। उनकी नाराजगी के बाद अलग बैठक हुई, उनके तर्क सुने गए और प्रभारी ने भरोसा दिया कि पूरी रिपोर्ट हाईकमान तक जाएगी।

इससे यह संदेश गया कि पंजाब कांग्रेस में चन्नी अब भी सबसे प्रभावशाली नेताओं में हैं। खासकर, करीब 32% दलित वोट बैंक को कांग्रेस नाराज नहीं करना चाहती। हालांकि, चन्नी को भी यह स्पष्ट संकेत मिला कि केवल राजनीतिक दबाव से संगठनात्मक फैसले नहीं बदलेंगे।

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पंजाब कांग्रेस में बगावत के बीच AICC के राज्य प्रभारी भूपेश बघेल ने शनिवार को चंडीगढ़ में बागी गुट से 2 घंटे मीटिंग की। इसमें हर वक्त माहौल गर्माया रहा। 3 सांसदों व 9 MLA वाले बागी गुट ने साफ कर दिया कि वह मौजूदा प्रधान राजा वड़िंग की अगुआई में काम नहीं कर सकते। पढ़ें पूरी खबर…



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