ये फोटो 17 जुलाई की जालंधर रैली की है, जिसमें रवनीत बिट्टू चिंता में नजर आ रहे थे और उन्होंने पीएम मोदी से बात भी की।
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह केंद्र की PM नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली NDA सरकार में पंजाब से इकलौते मंत्री थे। उनके इस्तीफे को 24 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है। बिट्टू के इस्तीफे
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हालांकि इसकी वजह ये भी है कि बिट्टू अब सांसद नहीं थे, उनका राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को ही खत्म हो गया था। BJP ने तब उन्हें दोबारा टिकट न देकर साफ कर दिया था कि उनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी होगी। बड़ा सवाल ये है कि 2027 के पंजाब चुनाव से महज 7 महीने पहले इकलौते मंत्री को क्यों हटाया गया, जबकि बिट्टू सांसद न रहते हुए भी 21 दिसंबर तक मंत्री बने रह सकते हैं।
अब चर्चा है कि केंद्र की मोदी कैबिनेट में पंजाब से नए चेहरों की एंट्री हो सकती है। इसमें सबसे चर्चित नाम राघव चड्ढा का है, जो AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। वह पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं। इस लिस्ट में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर अशोक मित्तल और अमृतसर के रहने वाले नए राज्यसभा सांसद तरूण चुघ का भी नाम शामिल है।

बिट्टू बोले- अब मेरा टाइम पंजाब के लिए है
इस्तीफे को लेकर रवनीत बिट्टू ने कहा- मैंने 2–3 महीने पहले ही इस बारे में रिक्वेस्ट की थी। जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालंधर आए थे, उस दिन भी मैंने ये बात कही। पिछले सेशन में भी मैं शामिल नहीं हुआ था।
जिस दिन मेरी राज्यसभा की टर्म खत्म हुई, मैंने उसी दिन इस्तीफा दे दिया था। मैं कल फिर उनसे मिला था। अब मेरा टाइम पंजाब के लिए है। आज भी मैं कई जगहों पर गया था। अब मुझ पर पंजाब में सरकार बनाने की जिम्मेदारी है, मैं इसी काम पर लगा हूं।
उन्होंने X(पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मुझे भारत सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश की सेवा करने का अवसर दिया।
भारत के लोगों, विशेषकर मेरे पंजाब के लोगों की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। मैं सेवा, राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखूंगा। जनसेवा की मेरी यात्रा नए संकल्प और समर्पण के साथ आगे भी जारी रहेगी।

रवनीत बिट्टू ने 2024 में भाजपा की टिकट पर लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद भी उन्हें सिख चेहरे के तौर पर केंद्र सरकार में शामिल किया गया था। फाइल फोटो
AAP बोली- बिट्टू सतलुज के बहाव में बह गए
AAP के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि रवनीत बिट्टू सतलुज के बहाव में बह गए। यह बात इसलिए कही गई क्योंकि दिलजीत दोसांझ की सतलुज मूवी को लेकर बिट्टू ने ही सबसे ज्यादा आलोचना की थी। हालांकि भाजपा के बड़े नेताओं ने उन्हें नसीहतें दी थी।

बिट्टू अब अगले साल होने वाला पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। फाइल फोटो
बिट्टू ने ‘सतलुज’ फिल्म मेकर्स को चुनौती दी थी
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर कहा था फिल्म पंजाब के उग्रवाद के दौर की केवल एकतरफा कहानी दिखाती है। उनके अनुसार, पंजाब पूरी सच्चाई का हकदार है, आधी कहानी का नहीं।
फिल्म निर्माताओं को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि फिल्म में 25,000 लोगों के लापता होने या अवैध अंतिम संस्कार का दावा किया गया है, तो उसके समर्थन में आधिकारिक रिकॉर्ड या दस्तावेज पेश किए जाएं, अन्यथा यह स्पष्ट किया जाए कि यह संख्या आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं है।
बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ पर भी निशाना साधते हुए उन्हें इम्पोस्टर (ढोंगी) कहा और कहा था कि उनकी आपत्ति फिल्म से ज्यादा उसके नैरेटिव और सार्वजनिक प्रस्तुति को लेकर है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि सरकार का OTT प्लेटफॉर्म के कंटेंट पर सीधा नियंत्रण नहीं होता। सरकार ने इस फिल्म को OTT पर रिलीज होने के दूसरे दिन भी भारत में बैन कर दिया था।
बेअंत सिंह की विरासत मिली, कांग्रेस से बगावत की
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति में बेअंत सिंह परिवार की तीसरी पीढ़ी का चेहरा हैं। पूर्व CM बेअंत सिंह के पोते होने के कारण उन्हें शुरुआत से ही कांग्रेस की विरासत मिली। 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा पहुंचकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री की। इसके बाद लुधियाना सीट से 2014 और 2019 में जीत दर्ज कर अपनी पकड़ बनाई।
कांग्रेस में रहते हुए बिट्टू को पार्टी के आक्रामक और मुखर नेताओं में गिना जाता था। किसान आंदोलन, कानून-व्यवस्था और पंजाब से जुड़े मुद्दों पर वे खुलकर अपनी राय रखते रहे। 2021 में उन्हें लोकसभा में कांग्रेस का नेता भी बनाया गया, लेकिन पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व विवादों के बीच उनका पार्टी से मोहभंग बढ़ता गया।
2024 लोकसभा चुनाव से पहले बिट्टू ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। यह कदम पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया, क्योंकि भाजपा को पहली बार एक मजबूत जट्ट सिख चेहरा मिला। हालांकि वे लुधियाना लोकसभा चुनाव हार गए, लेकिन भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया था।

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केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘सतलुज’ फिल्म के मेकर्स को खुली चुनौती दी है। बिट्टू ने मेकर्स को कहा कि उन 25,000 लापता या अवैध रूप से दाह-संस्कार किए गए शवों के पुख्ता दस्तावेजी सबूत, आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करें, जो फिल्म में दिखाए गए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)







