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PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल




पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की 2 फोटो… कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शन करने वाले संगठन JAAC के बारे में जानिए 5 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य JAAC ने सोशल मीडिया पर PoK के 10 जिलों की अनुमानित आबादी का आंकड़ा साझा किया। संगठन के मुताबिक, यदि प्रत्येक जिले से 50 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल हों तो कुल संख्या पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने लोगों से सफेद झंडे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उसका कहना है कि उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि प्रदर्शन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग के लिए है। पिछले महीने हिंसा में 30 की मौत हुई थी 8 जून को PoK में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। भारत ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से दखल देने की मांग की थी PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने पाकिस्तान पर फेक न्यूज और फेक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की तरफ से लगातार झूठी खबरें और वीडियो फैलाने का पैटर्न देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान हटाने की हताश कोशिश है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के गलत कामों और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराएगा। JAAC पर बैन लगा, जिसके बाद हिंसा भड़की सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रविवार को JAAC के कार्यकर्ता संगठन के एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सदस्य की मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, तभी झड़प शुरू हो गई और हिंसा फैल गई। रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर शॉटगन और अन्य हथियारों से हमला किया। पुलिस ने घटना को आतंकवादी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। PoK में 27 जुलाई को चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। ————————— पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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