पेंशन के पात्र पेड़ के सामने लिखी पूरी जानकारी।
झज्जर जिला पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी और प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहा है। जिले में अब इंसानों की तरह बुजुर्ग पेड़ों को भी बुढ़ापा पेंशन दी जा रही है। वर्तमान में झज्जर जिले के 121 विरासत और बुजुर्ग पेड़ों को हर महीने 3200 रुपए की पेंशन मिल
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सरकार की इस योजना का उद्देश्य वर्षों पुराने, ऐतिहासिक और विरासत माने जाने वाले पेड़ों को संरक्षित रखना तथा उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। विभाग द्वारा यह राशि पेड़ों की मेंटिनेंस, सुरक्षा, उपचार और संरक्षण कार्यों पर खर्च की जाती है।

पेंशन के पात्र पेड़ के सामने लिखा नाम।
28 नए पेड़ हुए पात्र, संख्या बढ़कर 121 पहुंची
झज्जर जिले में पहले 93 पेड़ इस योजना का लाभ ले रहे थे, लेकिन वर्ष 2025-26 में 28 और पेड़ पेंशन के लिए पात्र हो गए। इसके बाद जिले में कुल पेंशन प्राप्त करने वाले पेड़ों की संख्या बढ़कर 121 हो गई है। वन विभाग द्वारा इन पेड़ों का समय-समय पर सर्वे किया जाता है और निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले पेड़ों को योजना में शामिल किया जाता है।
500 साल पुराने पेड़ भी शामिल, तनों पर लिखी जाती है उम्र और नाम
इन विरासत पेड़ों की पहचान के लिए विभाग ने प्रत्येक पेड़ पर उसका नाम और अनुमानित उम्र अंकित कर रखी है। झज्जर जिले में कई ऐसे पेड़ हैं जिनकी उम्र 500 वर्ष तक पहुंच चुकी है। ये पेड़ न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी माने जाते हैं।

नीम के पेड़ के सामने लिखी पूरी जानकारी।
मातनहेल की ढाणी में 5 पेड़ ले रहे पेंशन, 5 और का हुआ सर्वे
मातनहेल गांव निवासी बिजेंद्र ने बताया कि उनकी ढाणी में फिलहाल 5 पेड़ बुढ़ापा पेंशन का लाभ ले रहे हैं। हाल ही में विभाग की टीम 5 अन्य पेड़ों का सर्वे करके गई है, जिन्हें भी जल्द योजना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पेंशन की राशि पूरी तरह पेड़ों की देखभाल और रखरखाव में ही खर्च की जाती है।
फॉरेस्ट अधिकारी बोले- संरक्षण के लिए दी जाती है राशि
जिला फॉरेस्ट अधिकारी शाहीदी रेडी ने बताया कि सरकार की ओर से यह राशि विभाग को उपलब्ध कराई जाती है ताकि पात्र पेड़ों की नियमित देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। जिले में फिलहाल 121 पेड़ योजना के लिए पात्र हैं और सभी को इसका लाभ दिया जा रहा है।

मातनहेल निवासी बिजेन्द्र सिंह।
लोगों के लिए भी बन रही जागरूकता का माध्यम
वन विभाग का मानना है कि इस योजना से न केवल पुराने पेड़ों का संरक्षण हो रहा है, बल्कि लोगों में पर्यावरण और विरासत वृक्षों के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। जिन पेड़ों पर उम्र और नाम लिखा होता है, उन्हें देखने के लिए लोग विशेष रूप से पहुंचते हैं और उनकी ऐतिहासिकता को समझते हैं।
दैनिक भास्कर एक्सक्लूसिव:
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क्या है बुजुर्ग पेड़ पेंशन योजना?
विरासत और अत्यधिक पुराने पेड़ों को दी जाती है पेंशन
हर महीने 3200 रुपए की सहायता
राशि पेड़ों की देखभाल और सुरक्षा पर खर्च होती है
वन विभाग समय-समय पर सर्वे कर नए पात्र पेड़ जोड़ता है
बहुत कम लोगों को पता इंसानो की तरह पेड़ो की पेंशन
बुजुर्ग इंसानो को पेंशन मिलती हैं सबको पता होगा, लेकिन पेड़ो को भी पेंशन मिलती हैं ये बहुत कम लोगों को ही पता था।
इंसानों के साथ-साथ पेड़ों को भी सम्मान और संरक्षण देने का यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सोच के रूप में देखा जा रहा है।
हर महीने पेड़ों की पेंशन पर खर्च होते हैं 3.87 लाख रुपए से अधिक
झज्जर जिले में बुजुर्ग पेड़ों को दी जा रही पेंशन पर हर महीने सरकार की ओर से कुल 3 लाख 87 हजार 200 रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जिले के 121 पात्र पेड़ों को प्रति पेड़ 3200 रुपए मासिक के हिसाब से यह राशि दी जाती है। यह पूरी रकम वन विभाग के माध्यम से संबंधित पेड़ों की देखभाल, सुरक्षा, उपचार, छंटाई और अन्य रखरखाव कार्यों पर खर्च की जाती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार द्वारा किया जा रहा यह निवेश राज्य की विरासत वृक्षों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







