हरियाणा में सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूर्व IAS अधिकारी और हरियाणा सरकार के पूर्व प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत भेजा गया है।
CBI ने पंचकूला की विशेष CBI अदालत में दाखिल आवेदन में कहा है कि आरोपी को रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है, सबूत नष्ट करा सकता है और जांच पर असर डाल सकता है।
CBI के अनुसार, यह मामला सरकारी विभागों के बैंक खातों के जरिए सरकारी धन को फर्जी संस्थाओं तक पहुंचाने की कथित साजिश से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि पंकज अग्रवाल उस अवधि में स्कूल शिक्षा विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में प्रधान सचिव के पद पर थे और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की अनुमति हरियाणा सरकार पहले ही दे चुकी है। 22 जून को घर से गिरफ्तार किया गया
CBI ने अदालत को बताया कि पंकज अग्रवाल को 22 जून 2026 को रात 8:30 बजे सेक्टर-19बी, चंडीगढ़ स्थित उनके आवास से BNSS की धारा 35(1)(c) के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया गया और 25 जून को अदालत में पेश किया गया। एजेंसी का कहना है कि आरोपी के खिलाफ ऐसे अपराध दर्ज हैं जिनमें 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। CBI ने इन डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों से सामना कराया CBI बोली- मोबाइल से सबूत डिलीट किए गए
CBI ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी के मोबाइल उपकरणों से अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य डिलीट या नष्ट किए गए हैं। एजेंसी ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को छोड़ा गया तो वह अन्य संदिग्धों को भी सबूत नष्ट करने के लिए प्रभावित कर सकता है।
एजेंसी ने कहा कि सरकारी धन की कथित हेराफेरी की पूरी रकम का पता लगाना अभी बाकी है और सोने की खरीद, संपत्तियों तथा अन्य लाभों की जांच की जा रही है। 14 दिन की न्यायिक हिरासत के पीछे वजह
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