चंडीगढ़4 मिनट पहले
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हरियाणा विधानसभा सचिव राजीव प्रसाद।
हरियाणा विधानसभा में प्रमोशन के एक मामले में कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का कथित उल्लंघन गंभीर मानते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा सचिवालय के सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उनसे यह भी पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। जस्टिस संदीप मौदगिल ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए साफ कहा कि अधिकारी को हलफनामा दाखिल कर अपनी कार्रवाई का कारण बताना होगा।
अदालत ने राज्य के वकील को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सचिव राजीव प्रसाद अगली सुनवाई पर खुद उपस्थित रहें और हलफनामे के जरिए यह स्पष्ट करें कि उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

ऐसे आया मामला सामने
यह मामला याचिकाकर्ता राजेश कुमार की ओर से दायर आवेदन पर सामने आया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 22 जनवरी को दिए गए यथास्थिति आदेश के बावजूद एक अधिकारी को प्रमोशन कर दिया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, राजिंदर सिंह को 30 मार्च के आदेश के जरिए नए बने उप सचिव (बहस) पद पर पदोन्नत किया गया। वे पहले कार्यवाहक अवर सचिव (बहस) के रूप में “बहस” के संपादक पद पर कार्य कर रहे थे। सीनियॉरिटी प्रमोशन का आधार नहीं
इन आरोपों को देखते हुए जस्टिस मौदगिल ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। हरियाणा की ओर से उप महाधिवक्ता टीवर शर्मा ने नोटिस स्वीकार किया। मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रणजीत सिंह कालरा और अश्मित कौर पेश हुए। याचिकाकर्ता ने पहले भी नियमों का हवाला देते हुए कहा था कि पदोन्नति वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, सिर्फ वरिष्ठता से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता। उनके वकील ने यह भी कहा कि प्रतिवादियों ने वरिष्ठता सूची का पालन किए बिना ही पदोन्नति कर दी। उन्होंने यह तक सवाल उठाया कि क्या कोई वरिष्ठता सूची बनी भी है, क्योंकि आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक यह मामला अभी विचाराधीन है।
बिना सूची के कर दिया प्रमोशन
वकील का कहना है कि आज तक अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार नहीं हुई है। ऐसे में बिना सूची के पदोन्नति करना गलत, अवैध और मनमाना है, जो अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग जैसा है। इससे पहले नोटिस जारी करते समय न्यायमूर्ति मौदगिल ने अगली सुनवाई तक पदोन्नति के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी दिया था।








