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54 करोड़ का GST घोटाले में परमगुरु को झटका:राधेश्याम-बसीलाल की जमानत याचिका खारिज, पत्नी के इलाज मामले में सुनवाई आज




हिसार में फ्यूचर मेकर कंपनी से जुड़े 54 करोड़ रुपए के वस्तु एवं सेवा कर (GST) घोटाले में कंपनी के सीएमडी (CMD) राधेश्याम और एमडी (MD) बंसीलाल को अदालत से बड़ा झटका लगा है। बुधवार को हिसार की अदालत में धारा 437(6) के तहत लगाई गई उनकी जमानत याचिका को जज राजीव की कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। आरोपियों ने दलील दी थी कि 60 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा नहीं हुआ है, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस मामले में अब 27 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की गई है। वहीं राधेश्याम की अंतरिम बेल को आगे बढ़ाने को लेकर आज एडीजे कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। परमगुरु राधेश्याम ने पत्नी के इलाज के लिए इस समय जेल से बाहर है। वह और समय जेल से बाहर रहने की मांग कर रहा है। इसको लेकर आज कोर्ट में सुनवाई होगी। जानिए कोर्ट में किस पक्ष ने क्या कहा… बचाव पक्ष बोला- 60 दिन बाद भी ट्रायल पूरा नहीं : सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने सीआरपीसी की धारा 437(6) का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि मामले की सुनवाई शुरू हुए 60 दिन से अधिक का समय हो गया है और ट्रायल पूरा नहीं हुआ है, इसलिए नियमतः आरोपी जमानत के हकदार हैं। दूसरी ओर, शिकायत पक्ष के अधिवक्ता देवेंद्र वर्मा और अनिल खुराना ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपियों की नियमित जमानत याचिका पहले ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिस पर 4 मई को सुनवाई होनी है। कोर्ट ने खारिज कर दी जमानत याचिका : शिकायत पक्ष ने कहा कि मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को देखते हुए इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट से भी इनकी याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों की याचिका को खारिज करने का आदेश सुनाया। पत्नी के इलाज के बहाने बाहर है राधेश्याम, आज फिर सुनवाई बता दें कि आरोपी बंसीलाल फिलहाल जेल में बंद है, जबकि सीएमडी राधेश्याम अपनी पत्नी के इलाज के आधार पर मिली अंतरिम जमानत के कारण जेल से बाहर है। राधेश्याम की अंतरिम बेल को आगे बढ़ाने को लेकर आज एडीजे (ADJ) कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। परमगुरु ने सदस्यता के नाम पर टैक्स डकारा इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग की जांच में सामने आया था कि ‘फ्यूचर मेकर’ कंपनी ने देशभर में जाल बिछाकर लोगों को सदस्य बनाया था। कंपनी प्रति सदस्य 3750 रुपये की फीस वसूलती थी। सदस्यता अभियान से करोड़ों रुपये जुटाए गए, लेकिन उस पर बनने वाला 54 करोड़ रुपए का जीएसटी सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया गया। विभाग द्वारा बार-बार नोटिस और कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद राधेश्याम और बंसीलाल ने 10 नवंबर 2025 को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था।



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