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कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर गमाडा (GMADA) के एस्टेट ऑफिसर का दफ्तर और सरकारी गाड़ी अटैच करने के आदेश दिया हैं। परमानेंट लोक अदालत ने यह आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई पीड़ितों को तय मुआवजा न देने और अदालती आदेशों की लगातार अनदेखी करने के कारण की गई
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अलॉटमेंट के बावजूद वहां बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करवाई गईं। सुविधाओं के अभाव से परेशान होकर मोहाली फेज-10 के निवासी जंग बहादुर सिंह और रवि शर्मा ने परमानेंट लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
चार पॉइंट में जानिए मामला
1. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने पाया कि गमाडा ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं। अदालत ने गमाडा को दोषी करार देते हुए शिकायतकर्ताओं को 1.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
2. कोर्ट ने भुगतान के लिए समय दिया था, लेकिन एस्टेट ऑफिसर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
3. जब मुआवजा नहीं मिला, तो शिकायतकर्ताओं के वकील ने अदालत में ‘एक्सीक्यूशन याचिका’ (Execution Petition) दायर कर दी।
4. कोर्ट की चेयरपर्सन ने आदेश की अवहेलना को देखते हुए तुरंत कुर्की के आदेश पारित कर दिए।
सोमवार को होगी कार्रवाई
अदालत ने केवल आदेश ही नहीं दिए, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए बैलिफ (Bailiff) भी नियुक्त कर दिया है। सोमवार को कोर्ट का प्रतिनिधि (बैलिफ) गमाडा दफ्तर पहुंचेगा। आदेशानुसार एस्टेट ऑफिसर की सरकारी गाड़ी और कार्यालय की संपत्ति को अटैच किया जाएगा।







