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चंडीगढ़ नगर निगम की 363वीं जनरल हाउस बैठक में 227 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने इसे 227 करोड़ का टेबल एजेंडा घोटाला बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक से जांच पूरी होने तक इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की अपील भी की है। लक्की ने चेतावनी दी कि यदि पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और सभी तथ्य सार्वजनिक नहीं किए गए तो चंडीगढ़ कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर अदालत तक उठाएगी। अपने बहुमत का इस्तेमाल किया लक्की ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए नगर निगम सदन को लोकतांत्रिक चर्चा का मंच बनाने के बजाय केवल प्रस्तावों पर मुहर लगाने वाली संस्था बना दिया है। उनका कहना है कि पंजाब म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1976 के तहत बैठक का एजेंडा निर्धारित समय सीमा के भीतर पार्षदों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी की गई। 72 घंटे पहले पार्षदों को देते एजेंडा कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि सरकार और नगर निगम की मंशा पूरी तरह पारदर्शी थी तो 227 करोड़ रुपये के प्रस्ताव का एजेंडा नियमों के अनुसार 72 घंटे पहले पार्षदों को क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा कि ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसके कारण जनता के टैक्स से जुड़े इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव को अंतिम समय में महज दो पन्नों के टेबल एजेंडे के माध्यम से सदन में लाकर मंजूर कराया गया। कोई स्पष्ट तकनीकी जानकारी भी नहीं रखी एच.एस. लक्की ने आरोप लगाया कि सदन के सामने परियोजना से जुड़ी कोई स्पष्ट तकनीकी जानकारी भी नहीं रखी गई। उन्होंने कहा कि यह नहीं बताया गया कि परियोजना किन पाइपलाइनों से संबंधित है, पुरानी पाइपलाइनें बदली जाएंगी या नई बिछाई जाएंगी, पाइप का आकार और तकनीकी मानक क्या होंगे तथा 227 करोड़ रुपये की लागत तय करने का आधार क्या है। उनका कहना है कि तकनीकी विवरण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सार्वजनिक किए बिना इतनी बड़ी राशि के प्रस्ताव को मंजूरी देना गंभीर सवाल खड़े करता है। लागत का मदवार ब्योरा किया जाए सार्वजनिक कांग्रेस ने मांग की है कि परियोजना की डीपीआर, तकनीकी स्वीकृतियां, लागत का मदवार ब्योरा, टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय मंजूरी से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही भविष्य में करोड़ों रुपये के वित्तीय प्रस्तावों को टेबल एजेंडे के रूप में लाने पर पूरी तरह रोक लगाने की व्यवस्था की जाए।
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