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यमुनानगर में अमृतसर के सर्राफ कारोबारी से दो किलो सोने के आभूषणों की दिनदहाड़े हुई लूट वारदात में अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। यह लूट अब केवल लुटेरों की तलाश तक सीमित नहीं रही। तीन दिन की जांच के बाद पुलिस ने पूरी पड़ताल का दायरा बदल दिया है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर वारदात से पहले कारोबारी की गतिविधियों, यात्रा के रूट और उसके पास मौजूद करोड़ों रुपये के सोने की जानकारी किस स्तर तक पहुंची थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक लूट की पूरी साजिश को समझ पाना मुश्किल होगा। यही कारण है कि पुलिस अब घटनास्थल पर मिले सुरागों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और कारोबारी की पूरे दिन की गतिविधियों को जोड़कर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया गया है और हर पहलू पर समानांतर तरीके से काम चल रहा है। वारदात से पहले की हर गतिविधि खंगाल रही पुलिस जांच टीम ने कारोबारी और उसके बेटे के उस दिन के पूरे मूवमेंट को दोबारा तैयार करना शुरू किया है। अमृतसर से रवाना होने के समय से लेकर यमुनानगर पहुंचने, अलग-अलग ज्वेलर्स से मुलाकात, डिलीवरी का क्रम, बीच-बीच में हुई फोन कॉल और वापस लौटने की तैयारी तक हर जानकारी को मिनट-दर-मिनट जोड़ा जा रहा है। पुलिस यह समझना चाहती है कि वारदात अचानक हुई या फिर किसी ने पहले से कारोबारी की गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी। इसी वजह से जांच अब केवल घटना के कुछ मिनटों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दिन की गतिविधियों को आधार बनाया गया है। डिजिटल ट्रेल से तलाशे जा रहे जवाब सूत्रों के अनुसार पुलिस ने पिता-पुत्र दोनों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन हिस्ट्री और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड जुटा लिए हैं। इसके साथ ही वारदात वाले इलाके और आसपास के मोबाइल टावरों से उस समय सक्रिय मोबाइल नंबरों का डेटा भी निकाला जा रहा है। जांच एजेंसियां यह मिलान कर रही हैं कि कहीं कोई ऐसा मोबाइल नंबर तो नहीं था जिसकी लोकेशन लगातार कारोबारी की यात्रा के साथ-साथ बदलती रही हो। यदि ऐसा कोई पैटर्न सामने आता है तो वह जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। व्हाट्सएप ग्रुप की गतिविधियां भी जांच के दायरे में पुलिस को जांच में पता चला है कि कारोबारी जयपाल सिंह का यमुनानगर और जगाधरी के कई सर्राफ कारोबारियों से नियमित व्यापारिक संपर्क था। वह अक्सर शहर आने से पहले या पहुंचने के बाद व्यापारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश डालता था कि वह माल लेकर पहुंच चुका है। इसके बाद अलग-अलग दुकानों पर जाकर ऑर्डर के अनुसार आभूषणों की डिलीवरी की जाती थी। अब जांच टीम यह पता लगा रही है कि घटना वाले दिन संदेश किस समय भेजा गया, उसके बाद किन व्यापारियों ने संपर्क किया और डिलीवरी किस क्रम में हुई। पुलिस इस पूरी सूचना श्रृंखला का विश्लेषण कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कारोबारी की लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी किन-किन लोगों तक पहुंची। कारोबारी ने पूछताछ के तरीके पर जताई आपत्ति उधर, अमृतसर लौटे कारोबारी जयपाल सिंह ने एफआईआर दर्ज होने में देरी और लगातार हो रही पूछताछ पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वह और उनका बेटा जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कई बार थाना, सीआईयू और घटनास्थल पर बुलाकर एक ही तरह के सवाल पूछे जा चुके हैं। जयपाल का कहना है कि उनका बेटा पहली बार यमुनानगर आया था। घटना के तुरंत बाद घायल होने की वजह से वह घटनास्थल की सही पहचान नहीं कर पाया था। बाद में स्वस्थ होने पर उसने पुलिस को वास्तविक स्थान दिखा दिया, लेकिन शुरुआती और बाद के बयानों में आए इस अंतर को लेकर अब भी उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि पुलिस को घटना पर संदेह है तो उसे स्पष्ट रूप से सामने लाया जाए, लेकिन तीन दिन बाद भी एफआईआर दर्ज न होना कई सवाल खड़े करता है। जांच के सामने अभी भी कई अनसुलझे सवाल जांच एजेंसियां फिलहाल कई महत्वपूर्ण बिंदुओं के जवाब तलाश रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बदमाशों ने वारदात से पहले कारोबारी की गतिविधियों की रेकी की थी या फिर उन्हें किसी माध्यम से कारोबारी की यात्रा और माल की जानकारी मिली थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा। मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप गतिविधियां, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों को एक-दूसरे से जोड़कर पूरी घटना का क्रम तैयार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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