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गुरुग्राम में सोहना-चौक हादसे के आरोपी की जमानत याचिका खारिज:19 साल के युवक की मौत का जिम्मेदार, घायल युवती अब भी वेंटिलेटर पर




गुरुग्राम में सोहना चौक पर हुए दर्दनाक कार हादसे के मुख्य आरोपी थार चालक रोहित यादव (23 वर्ष) की नियमित जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। एडिशनल सेशन जज वर्षा जैन की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया और उसे ज्यूडिशियल कस्टडी में ही रखने का आदेश जारी किया। इससे पहले 24 जुलाई को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने भी आरोपी की जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया था, जिसके बाद उसने सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाई। 17 जुलाई को तड़के करीब 4:40 बजे ओल्ड जेल चौक (सोहना चौक) पर तेज रफ्तार थार चला रहे रोहित ने बलेनो कार को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों में 19 वर्षीय टैटू आर्टिस्ट दिव्यांश चड्ढा भी शामिल था, जिसने सिर, गर्दन और पसलियों में गंभीर चोटें आने के कारण अस्पताल में चार दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद 21 जुलाई को दम तोड़ दिया। पुलिस ने जोड़ी सख्त धाराएं
हादसे के बाद शिवाजी नगर थाना पुलिस ने शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने और चोट पहुंचाने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, जांच के दौरान और दिव्यांश की मौत के बाद, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें गैर-इरादतन हत्या का प्रयास को भी शामिल किया गया। बचाव पक्ष की दलील
सुनवाई के दौरान आरोपी रोहित के वकील ने दलील दी कि जांच एजेंसी ने बिना किसी ठोस सबूत के एक सीधे सड़क हादसे को गैर-इरादतन हत्या के प्रयास के मामले में बदल दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि हादसा सुबह के वक्त एक चौराहे पर हुआ और दोनों पक्षों के बीच कोई पुरानी दुश्मनी या जान-पहचान नहीं थी। केवल तेज गति या लापरवाही के आधार पर धारा 110 के लिए आवश्यक ‘इरादे या ज्ञान’ की कानूनी शर्त पूरी नहीं होती है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गाड़ी, दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज पहले ही पुलिस के कब्जे में हैं, इसलिए अब हिरासत की जरूरत नहीं है। पीड़ित के वकीलों ने किया विरोध दूसरी ओर, पीड़ित परिवार के वकीलों ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी के शराब के नशे में होने का संदेह है, जिसकी सीएफएसएल रिपोर्ट का अभी इंतजार है। आरोपी को यह भली-भांति पता था कि इतनी तेज गति से गाड़ी चलाने पर किसी की जान जा सकती है, इसलिए उस पर आपराधिक कृत्य से मृत्यु करना भी लगाई जानी चाहिए। वकीलों ने आशंका जताई कि बाहर आने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। युवती अब भी वेंटिलेटर पर
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इस हादसे में घायल हुई एक अन्य रिश्तेदार याशिका चड्ढा (22) की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। वह अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और उसकी कई सर्जरी हो चुकी हैं। पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी और फॉरेंसिक जांच को आगे बढ़ा रही है।



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