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चंडीगढ़ की अदालत ने दो साल पुराना केस किया खारिज:कांग्रेस विधायक परगट सिंह समेत 15 नेताओं को राहत,पुलिस को जांच में नहीं मिले सबूत




जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह समेत 15 कांग्रेस नेताओं को चंडीगढ़ जिला अदालत से राहत मिली है। चंडीगढ़ अदालत ने दो साल पुराने आपराधिक मामले में पुलिस द्वारा दाखिल कैंसलेशन रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए केस खारिज कर दिया। पुलिस ने जांच में नेताओं के खिलाफ आरोप साबित करने लायक कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही थी। यह मामला 20 फरवरी 2024 का है। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने परगट सिंह समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। उन पर पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, सरकारी कार्य में बाधा डालने और जिला प्रशासन के आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए थे। किसान आंदोलन के समर्थन में कर रहे थे प्रदर्शन एफआईआर के अनुसार, कांग्रेस नेता पंजाब-हरियाणा सीमा पर किसानों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी हाथों में पार्टी के झंडे लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और हरियाणा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तथा झड़प में कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए। इसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच में नहीं मिले आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मामले की जांच के दौरान पुलिस को परगट सिंह समेत अन्य आरोपित नेताओं के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने चंडीगढ़ जिला अदालत में कैंसलेशन रिपोर्ट दाखिल की। अदालत ने रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद उसे स्वीकार कर लिया और एफआईआर को खारिज कर दिया। इस बीच, विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प के एक अन्य मामले में चंडीगढ़ प्रशासन आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। करीब 5 वर्ष पहले दर्ज एक मामले में मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान, मंत्री अमन अरोड़ा, हरपाल सिंह चीमा और अन्य नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प के आरोप में केस दर्ज किया गया था। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उस एफआईआर को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले को चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है।



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