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कुरुक्षेत्र में किसान ने बिजली कार्यालय के बाहर निगला जहर:भाई का आरोप- विभागीय अनदेखी से था परेशान; बिजली विभाग ने आरोपों से किया इनकार




कुरुक्षेत्र के पिहोवा के गांव रामगढ़ रोड में ट्यूबवेल कनेक्शन को लेकर चल रहे विवाद से परेशान होकर एक किसान ने बिजली विभाग के कार्यालय के बाहर जहरीला पदार्थ निगल लिया। गंभीर हालत में उसे सरस्वती मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने समय रहते उपचार कर उसकी जान बचा ली। फिलहाल किसान आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पीड़ित किसान की पहचान गांव रामगढ़ रोड निवासी 42 वर्षीय जितेंद्र के रूप में हुई है। उसके भाई नरेंद्र ने आरोप लगाया कि गांव में दो पक्षों के बीच चल रहे विवाद के कारण उन्हें नया ट्यूबवेल बिजली कनेक्शन नहीं लेने दिया जा रहा है। 30 हजार रूपए सिक्योरिटी भी जमा करा चुके कनेक्शन न होने पर उनकी खेती प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि कई वर्ष पहले ही विभाग में 30 हजार रुपए सिक्योरिटी राशि जमा करवाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कनेक्शन जारी नहीं किया गया। नरेंद्र के अनुसार गांव में गुटबाजी के चलते उनके खिलाफ लगातार शिकायतें की जाती हैं, जिससे विभागीय स्तर पर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। बार-बार विभाग के चक्कर लगाने और समस्या का समाधान न होने से उनका भाई मानसिक रूप से परेशान हो गया था। इसी तनाव के चलते सोमवार को उसने बिजली विभाग के कार्यालय के सामने कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया। घटना के बाद परिजन उसे तुरंत सरस्वती मिशन अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अमित अरोड़ा ने बताया कि मरीज द्वारा हरबीसाइड (खरपतवार नाशक) पीने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्रक्रिया अपनाई। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बच गई। बिजली अधिकारियों ने खारिज किए आरोप उधर, बिजली विभाग के एसडीओ प्रिंस बूरा ने किसान परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने कभी भी किसान को नया कनेक्शन देने से इनकार नहीं किया। एसडीओ के अनुसार नए कनेक्शन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत एस्टीमेट राशि जमा करवानी होती है। फरवरी 2026 में संबंधित किसान को राशि जमा करवाने के लिए नोटिस भी भेजा गया था। उन्होंने बताया कि राशि जमा करवाने की बजाय किसान ने विभाग को एक शपथ पत्र दिया था, जिसमें कहा गया था कि उनके खेत के पास लगा 100 केवीए ट्रांसफार्मर ओवरलोड है। इसलिए पहले वहां नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाए और उसके बाद उसी ट्रांसफार्मर से उन्हें कनेक्शन दिया जाए। आपसी गुटबाजी और विवाद से जुड़ा है मामला एसडीओ के मुताबिक विभाग ने नया ट्रांसफार्मर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और ठेकेदार कंपनी ने मौके पर पोल भी खड़े कर दिए थे। लेकिन जब कंपनी के कर्मचारी ट्रांसफार्मर लगाने पहुंचे तो जिस खेत में पोल लगाए गए थे, उसके मालिक ने आपत्ति जताते हुए कार्य रुकवा दिया। इसके बाद विभाग ने बाधा उत्पन्न करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सदर थाना पुलिस को शिकायत भी दी। प्रिंस बूरा ने कहा कि यह मामला विभाग से ज्यादा गांव की आपसी गुटबाजी और विवाद से जुड़ा हुआ है। विभाग की ओर से कनेक्शन जारी करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होना जरूरी हैं। घटना के बाद पुलिस भी जांच के लिए विभाग पहुंची थी और विभाग की ओर से सभी तथ्य पुलिस को उपलब्ध करा दिए गए हैं।



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