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शनिवार को पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। वरिष्ठ नेता अमरिंदर सिंह लिबड़ा औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उन्होंने हाल ही में शिरोमणि अकाली दल (पुनर-सुरजीत) की कोर कमेटी और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। फतेहगढ़ साहिब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के साथ संगठन की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर हलका दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह इयाली और सांसद अमृतपाल सिंह के पिता बापू तरसेम सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। दोनों नेताओं ने अमरिंदर सिंह लिबड़ा और उनके समर्थकों का संगठन में स्वागत किया। विधायक मनप्रीत सिंह इयाली ने घोषणा की कि वह 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। धर्म युद्ध मोर्चा पंथक नेताओं से विचार विमर्श के बाद उन्होंने शिरोमणि अकाली दल द्वारा सरकार के खिलाफ प्रस्तावित ‘धर्म युद्ध मोर्चा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर पंथक नेताओं के साथ विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय करेंगे। पत्रकारों से बातचीत में अमरिंदर सिंह लिबड़ा ने बताया कि उन्होंने यह निर्णय अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की भावनाओं और पंजाब के मौजूदा राजनीतिक व सामाजिक हालात को देखते हुए लिया है। उन्होंने कहा कि वह जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे और पंजाब के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमरिंदर सिंह लिबड़ा का ‘वारिस पंजाब दे’ में शामिल होना पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। इसका असर विशेष रूप से मालवा क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।
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अमरिंदर सिंह लिबड़ा 'वारिस पंजाब दे' में शामिल:फतेहगढ़ साहिब में सांसद अमृतपाल के पिता और MLA अय्याली मौजूद







