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Chandigarh IDFC Bank Scam | CBI ED Probe on Jewelers Financial Dealings


IDFC फर्स्ट बैंक और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में ज्वेलर्स की भूमिका की जांच की मांग।

IDFC फर्स्ट बैंक और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में अब कुछ ज्वेलर्स की भूमिका की जांच की मांग उठी है। एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के स्टेट डायरेक्टर और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील पुनीत छाबड़ा ने केंद्रीय जांच

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पुनीत छाबड़ा ने अपने पत्र में कहा है कि IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड मामले की जांच के शुरुआती चरण में कुछ व्यक्तियों और व्यावसायिक संस्थाओं के नाम सामने आए थे, जिनका कथित तौर पर धन के हस्तांतरण, उपयोग या मनी लॉन्ड्रिंग से संबंध हो सकता है। हालांकि काफी समय बीत जाने के बावजूद इन प्रभावशाली व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई या जांच आगे बढ़ती दिखाई नहीं दी।

पुनीत छाबड़ा ने कहा कि इस शिकायत का उद्देश्य जांच एजेंसियों की मदद करना है ताकि घोटाले से जुड़े हर व्यक्ति को जांच के दायरे में लाया जा सके और कानून के शासन में जनता का विश्वास कायम रहे। उन्होंने मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

इन ज्वेलर्स के नामों का किया उल्लेख

शिकायत में आरोप लगाते हुए सेक्टर-35 के दो, सेक्टर-34, सेक्टर-8, सेक्टर-23 और मोहाली एयरोसिटी के नामों ज्वेलर की जांच कराने की मांग की गई है। छाबड़ा ने पत्र में कहा कि इन लोगों या संस्थानों के पास घोटाले से जुड़े पैसों के लेन-देन और इस्तेमाल से संबंधित अहम जानकारी हो सकती है। इसलिए इनके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, कारोबार, संपत्तियों और आरोपियों से संभावित संबंधों की जांच की जानी चाहिए।

ये पत्र लिखा।

ये पत्र लिखा।

प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश

पत्र में कहा गया है कि जिन लोगों के नाम जांच के दौरान सामने आए थे, उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि कुछ प्रभावशाली लोगों को जांच से बचाया जा रहा है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों को जांच करनी चाहिए।

पुनीत छाबड़ा ने CBI और ED से मांग की है कि संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच की जाए। उनके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और व्यावसायिक दस्तावेजों की पड़ताल की जाए। साथ ही घोटाले के आरोपियों और कथित लाभार्थियों से उनके संबंधों की भी जांच हो।

उन्होंने मांग की है कि जांच में यदि कोई व्यक्ति सीधे या परोक्ष रूप से घोटाले, मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध धन को छिपाने में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।



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