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चंडीगढ़ में रिश्वत लेते पकड़ा ASI अपने बैच का टॉपर:DDR के दम पर मांगे 50 हजार, DGP बोल चुके- सुपरविजन की भी होगी जवाबदेही




चंडीगढ़ में पुलिस स्टेशन-39 में तैनात एएसआई, जो अभी प्रोबेशन पर था और उसे अभी अढ़ाई साल ही हुए थे, एएसआई हितेश अपने बैच का टॉपर था। चंडीगढ़ में एएसआई की भर्ती के लिए 1000 से ऊपर आवेदन आए थे और सभी ने परीक्षा भी दी थी। इसके बाद चंडीगढ़ में 5 एएसआई चयनित हुए थे, जिनमें हितेश टॉपर था। सीबीआई द्वारा 40 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़े गए एएसआई हितेश ने अपनी जॉइनिंग के बाद पुलिस स्टेशन-39 में कितने केस डील किए, इसकी भी अपने स्तर पर चंडीगढ़ पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है। वहीं, चंडीगढ़ के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा भी सख्त चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कोई पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़ा जाता है, तो उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा। साथ ही संबंधित सुपरविजन अधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी। घायल का खर्च उठाने पर हुआ समझौता सीबीआई में दर्ज शिकायत के अनुसार अमरजीत सिंह 28 मार्च 2026 की रात करीब साढ़े 8 बजे मारुति सुजुकी बलेनो कार से सेक्टर-40 से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनके घर के पास मोटरसाइकिल सवार चरणजीत सिंह की उनकी कार से टक्कर हो गई। उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि मोटरसाइकिल सवार को गंभीर चोट लगी है और वह वहां से चले गए। अगले दिन 29 मार्च को उन्हें सेक्टर-39 थाना में तैनात एएसआई हितेश कुमार का फोन आया। एएसआई ने बताया कि दुर्घटना के संबंध में थाना सेक्टर-39 में DDR दर्ज की गई है और जांच उसके पास है। उसने यह भी बताया कि घायल को फ्रैक्चर आया है तथा उसे सेक्टर-16 अस्पताल से पीजीआई रेफर किया गया है। इसके बाद अमरजीत सिंह पीजीआई पहुंचे और घायल चरणजीत सिंह व उसके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने घायल के इलाज का खर्च उठाने की पेशकश की, जिस पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के बाद कार्रवाई की धमकी शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बावजूद एएसआई हितेश कुमार लगातार उन्हें फोन कर थाने बुलाता रहा और कार्रवाई की चेतावनी देता रहा। आगे बताया गया कि 3 जून को एएसआई ने उन्हें कार सहित थाना सेक्टर-39 बुलाया। वहां उसने कहा कि एक्सीडेंट मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया जा सकता है और वाहन को पुलिस कब्जे में लिया जा सकता है। अमरजीत सिंह ने उसे बताया कि घायल पक्ष के साथ समझौता हो चुका है और किसी ने कोई शिकायत नहीं दी है। इसके बावजूद एएसआई ने कहा कि शिकायत बनवाना उसके लिए मुश्किल नहीं है और वह कभी भी कार्रवाई कर सकता है। कार कब्जे में लेकर पैसों की मांग एएसआई ने शिकायतकर्ता की कार अपने कब्जे में ले ली, लेकिन जब्ती से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि एएसआई ने संकेत दिया कि यदि वह केस दर्ज होने से बचना चाहता है और अपनी गाड़ी वापस लेना चाहता है तो उसे पैसे देने होंगे। जब अमरजीत सिंह ने पूछा कि कितनी रकम देनी होगी, तो एएसआई ने कोई निश्चित राशि नहीं बताई और कहा कि अपनी क्षमता और बजट के अनुसार पैसे दे दो। शिकायतकर्ता के अनुसार एएसआई की बातचीत और व्यवहार से साफ था कि वह अवैध रिश्वत की मांग कर रहा था। प्रूफ समेत CBI को शिकायत इसके बाद 4 जून को अमरजीत सिंह ने सीबीआई से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह की रिश्वत नहीं देना चाहते और मामले में कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद उसकी जांच की और शिकायतकर्ता व एएसआई के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड की। जांच में पता चला कि एएसआई हितेश कुमार ने गाड़ी छोड़ने और दुर्घटना मामले में कार्रवाई न करने के बदले 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और एएसआई को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए सेक्टर-39 थाना परिसर के अंदर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।



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