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रोहतक जिले के खरकड़ा गांव की मनीषा ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर महिला उद्यमिता की नई मिसाल पेश की है। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि मनीषा ने वर्ष 2020 में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 3 एकड़ क्षेत्र में मीठे पानी की मत्स्य पालन परियोजना शुरू की और पहले ही उत्पादन चक्र में करीब 50 मीट्रिक टन मछली उत्पादन कर लगभग 5 लाख रुपए की आय अर्जित की। उपायुक्त ने कहा कि मनीषा की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने किसानों, युवाओं और महिलाओं से मत्स्य पालन सहित कृषि आधारित गतिविधियों को अपनाकर स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने का आह्वान किया। हिसार एआरटीआई से ली ट्रेनिंग मनीषा को जलीय कृषि में कार्य करने की प्रेरणा एक समाचार पत्र में प्रकाशित लेख से मिली थी। परिवार की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2020 में हिसार स्थित एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एआरटीआई) से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने खरकड़ा गांव के निकट तीन एकड़ क्षेत्र में मीठे पानी की मत्स्य पालन परियोजना शुरू की। मत्स्य विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण, मनीषा ने पहले ही उत्पादन चक्र में लगभग 50 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हासिल किया। इससे उन्हें लगभग 5 लाख रुपए की आय प्राप्त हुई। यह उपलब्धि दर्शाती है कि आधुनिक तकनीकों और उचित प्रशिक्षण के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। ‘उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत’ उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इन क्षेत्रों में उपलब्ध प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। गुप्ता ने मनीषा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अधिक से अधिक महिलाएं ऐसे नवाचारपूर्ण और लाभकारी व्यवसायों को अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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खरकड़ा की मनीषा ने मत्स्य पालन से कमाए ₹5 लाख:50 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया; डीसी बोले-महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं







