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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी अशोक खेमका को बड़ी राहत दी है। अदालत ने व्यवस्था दी है कि भले ही अशोक खेमका रिटायर हो चुके हैं, लेकिन भविष्य के असाइनमेंट और पदों पर विचार के लिए उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव, सचिव के स्तर पर एम्पैनल माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसने खेमका की इस मांग को ठुकरा दिया था। क्या था पूरा मामला?
अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। साल 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव के पद पर एम्पैनल किया गया था। हालांकि, खेमका को इस लाभ से यह कहकर वंचित कर दिया गया कि उन्होंने केंद्र सरकार में डिप्टी सचिव या उससे ऊपर के पद पर न्यूनतम 3 वर्ष की प्रतिनियुक्ति की अनिवार्य शर्त को पूरा नहीं किया है। इस नियम में ढील देने से इनकार करते हुए ट्रिब्यूनल ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत में याचिकाकर्ता की दलीलें
खेमका के वकील ने अदालत में दलील दी कि केंद्र सरकार का यह रुख पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। उन्होंने ऐसे 20 आईएएस अधिकारियों की सूची पेश की, जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का शून्य (NIL) अनुभव होने के बावजूद नियमों में ढील देकर अतिरिक्त सचिव या सचिव के रूप में एम्पैनल किया गया था।
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