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पंजाब के मोगा जिले की मुख्य अनाज मंडी में प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मंडी से गेहूं की लिफ्टिंग की सुस्त रफ्तार के कारण लाखों क्विंटल गेहूं की बोरियां कई दिनों से खुले आसमान के नीचे पड़ी थीं। रविवार को हुई अचानक बारिश ने इन बोरियों को बुरी तरह भिगो दिया, जिससे अब किसानों को अपनी मेहनत की फसल खराब होने और भारी आर्थिक नुकसान होने का डर सता रहा है। रविवार को हुई इस हल्की बारिश ने अनाज के सुरक्षित भंडारण को लेकर किए गए प्रशासनिक दावों की हकीकत बयां कर दी। बारिश का पानी सीधे गेहूं की बोरियों पर गिरा क्योंकि उनके ऊपर ढकने के लिए कोई तिरपाल या प्लास्टिक कवर नहीं था। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बोरियां बिना किसी रैक या लकड़ी के फट्टों के सीधे जमीन पर रखी गई थीं, जिसके कारण नीचे की बोरियों में नमी आने का खतरा और भी बढ़ गया है। अतिरिक्त रैक लगाई और ट्रालियां मंगवाई नुकसान की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू किए गए। आनन-फानन में मंडी में अतिरिक्त रैक और ट्रालियां मंगवाई गईं। मजदूरों की सहायता से भीगी हुई बोरियों को उठाकर सुरक्षित और सूखी जगहों पर पहुँचाया जा रहा है। साथ ही, अब बोरियों को रैक पर लगाकर ढेरियां बनाई जा रही हैं ताकि हवा के जरिए गेहूं को सुखाया जा सके और उसे फफूंद लगने से बचाया जा सके। समय पर लिफ्टिंग न होने से उठा सवाल मंडी में मौजूद किसानों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। किसानों का कहना है कि यदि खरीदी गई फसल की समय रहते लिफ्टिंग कर दी गई होती, तो आज यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक ढिलाई और खराब प्रबंधन की वजह से उनकी फसल बर्बाद हो रही है, जबकि वे पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। किसानों को मुआवजा देने की मांग इस घटना के बाद अब लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठने लगे हैं। किसान संगठनों ने मांग की है कि इस नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि यदि दोबारा बारिश होती है, तो खुले में पड़ा बाकी अनाज भी बर्बाद हो सकता है, जिसके लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।
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मोगा अनाज मंडी में बारिश से लाखों टन गेहूं भीगा:धीमी लिफ्टिंग से बिगड़े हालात,प्रशासन के दावों की पोल खुली, किसानों में भारी रोष







