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चंडीगढ़ में पूर्व सैनिकों को बड़ी राहत:100% मकान कर माफी का प्रस्ताव पास, परिवारों में खुशी; पंजाब-हरियाणा के बराबर हुआ फैसला




चंडीगढ़ नगर निगम ने पूर्व सैनिकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मकान कर में 100% छूट देने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इस फैसले से हजारों पूर्व सैनिक परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और उनमें खुशी का माहौल है। शुक्रवार को नगर निगम सदन की बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तहत अब उन पूर्व सैनिकों को पूरी टैक्स माफी मिलेगी, जिनके नाम पर या पत्नी के साथ संयुक्त रूप से एक ही रिहायशी मकान है और वह निर्धारित सीमा के भीतर आता है। इससे पहले ऐसे मामलों में केवल 50% छूट दी जाती थी। पंजाब-हरियाणा के बराबर हुआ फैसला
अब तक चंडीगढ़ के पूर्व सैनिक खुद को पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के मुकाबले वंचित महसूस कर रहे थे, क्योंकि वहां पहले से ही मकान कर में 100% छूट का प्रावधान लागू है। इसके विपरीत, चंडीगढ़ में उन्हें केवल 50% तक ही छूट मिलती थी, जिससे कई पूर्व सैनिकों में असंतोष था और वे इसे अपने साथ भेदभाव के रूप में देख रहे थे। पूर्व सैनिकों का कहना था कि देश की सेवा के बाद उन्हें समान सम्मान और सुविधाएं मिलनी चाहिए, चाहे वे किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में रहते हों। इसी मांग को लेकर उन्होंने समय-समय पर अपने-अपने क्षेत्रों के पार्षदों और प्रशासन के समक्ष यह मुद्दा उठाया। इसी पृष्ठभूमि में नगर निगम के सदन में यह प्रस्ताव लाया गया, ताकि चंडीगढ़ के पूर्व सैनिकों को भी पंजाब और हरियाणा के बराबर लाभ मिल सके। नगर निगम पर ज्यादा बोझ नहीं
सदन में चर्चा के दौरान पार्षदों ने कहा कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों को सम्मान और सुविधाएं देना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग वर्षों तक देश की सुरक्षा में लगे रहे, उन्हें रिटायरमेंट के बाद बुनियादी राहत मिलनी चाहिए। पार्षदों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना से लाभ पाने वाले पूर्व सैनिकों की संख्या ज्यादा नहीं है, क्योंकि यह छूट केवल एकमात्र रिहायशी संपत्ति और तय सीमा के भीतर आने वालों को ही मिलेगी। ऐसे में नगर निगम के राजस्व पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे पूर्व सैनिकों को अहम आर्थिक राहत जरूर मिलेगी। लंबे समय से उठ रही थी मांग
यह मुद्दा काफी समय से लंबित था और पूर्व सैनिक लगातार इसकी मांग कर रहे थे। उन्होंने अपने-अपने इलाकों के पार्षदों के जरिए कई बार नगर निगम तक अपनी बात पहुंचाई। अब जब यह प्रस्ताव पास हो गया है, तो पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। उन्हें लग रहा है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है, जिससे उन्हें आर्थिक राहत भी मिलेगी।



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