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हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी से मिलेंगे ग्रामीण:चंडीगढ़ में होगी मुलाकात, बालसमंद को नहरी पानी की मांग, बोले- सूखे की मार झेल रहे




दक्षिण हरियाणा के सूखाग्रस्त बालसमंद क्षेत्र में नहरी पानी की वर्षों पुरानी मांग को लेकर एक बार फिर प्रयास तेज हो गए हैं। क्षेत्र के किसानों, ग्रामीण और सामाजिक प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल 3 जून को चंडीगढ़ में हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी से मुलाकात करेगा। इस बैठक में क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल संकट से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बालसमंद, बुड़ाक, डोभी, सुंडावास, बांडाहेड़ी, खारिया, सरसाना, बासड़ा और भिवानी रोहिल्ला सहित आसपास के कई गांव लंबे समय से नहरी पानी की कमी और लगातार गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहे हैं। यह क्षेत्र दशकों से सूखे की मार झेल रहा है। किसान कुरड़ाराम नम्बरदार, जगदीश लौरा, अनिल शर्मा, अनिल लौरा, पवन, बलवान सैनी और वीरेंद्र पुनिया जैसे स्थानीय प्रतिनिधियों ने बताया कि पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध न होने के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही, कई गांवों में पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। पूर्व कृषि मंत्री ने दिया था आश्वासन ग्रामीणों का कहना है कि नहरी पानी की यह मांग नई नहीं है। पूर्व कृषि मंत्री स्वर्गीय चौधरी सुरेंद्र सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान लाडवी नहर को बालसमंद क्षेत्र से जोड़ने का आश्वासन दिया था। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि इस योजना के पूरा होने से सूखाग्रस्त इलाके को बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन उनके असामयिक निधन के बाद यह योजना अधूरी रह गई। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि इस योजना को आगे बढ़ाया जाता है, तो यह स्वर्गीय चौधरी सुरेंद्र सिंह के अधूरे सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। ग्रामीणों का अनुमान है कि इस योजना के लागू होने से बालसमंद क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों की हजारों एकड़ कृषि भूमि को पर्याप्त सिंचाई जल मिल सकेगा। साथ ही, क्षेत्र की पेयजल समस्या दूर होने के साथ भूजल स्तर में भी सुधार आने की उम्मीद है। सीसवाला हेड पर 200 क्यूसेक पानी देने की मांग प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पारस लौरा ने बताया कि मंत्री के समक्ष प्रमुख मांग रखी जाएगी कि राजस्थान जाने वाली यमुना जल परियोजना से सीसवाला हेड पर कम से कम 200 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाए। इससे क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल समस्या के स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके अलावा लाखपुल से डोभी गौशाला तक प्रस्तावित 17 क्यूसेक क्षमता की पुरानी पाइपलाइन योजना के स्थान पर लाडवी से बालसमंद और सरसाना तक पक्की नहर अथवा उच्च क्षमता की नई पाइपलाइन के निर्माण की मांग भी रखी जाएगी।



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