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हरिके पट्टन में शहीदों की याद में अरदास:अकाल तख्त ने शहीदी स्मारक बनाने और शहीदों का रिकॉर्ड तैयार करने का ऐलान किया




श्री अकाल तख्त साहिब ने खालसा पंथ और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सहयोग से हरिके पट्टन में 1984 और उसके बाद के दशकों के शहीदों की स्मृति में विशेष अरदास समारोह आयोजित किया। समारोह विशेष रूप से मानवाधिकार कार्यकर्ता और राष्ट्रीय शहीद भाई जसवंत सिंह खालरा सहित उन सभी लोगों को समर्पित था, जिनकी जान उस दौर में गई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य पीड़ित परिवारों और पंथ को न्याय दिलाने के लिए सामूहिक प्रार्थना करना भी था। समारोह की शुरुआत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र बीड़ से सजी विशेष पालकी के साथ हुई। इसके बाद श्री सुखमनी साहिब का पाठ किया गया। सचखंड श्री हरमंदिर साहिब से पहुंचे भाई सिमरप्रीत सिंह के हजूरी रागी जत्थे ने गुरबानी कीर्तन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को जत्थेदार ने संबोधित किया कार्यक्रम की अंतिम अरदास श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार एवं तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने की। अपने संबोधन में जत्थेदार गरगज्ज ने उन लोगों को याद किया जिन्हें कथित तौर पर लावारिस घोषित कर अंतिम संस्कार कर दिया गया या नदियों में बहा दिया गया। उन्होंने कहा कि हरिके पट्टन वह स्थान है, जहां भाई जसवंत सिंह खालरा समेत हजारों नौजवानों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के शव बहाए जाने के आरोप जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद सामान्यतः सभी शत्रुताएं समाप्त हो जाती हैं, लेकिन उस दौर में मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए शवों को भी उनके परिजनों तक नहीं पहुंचाया गया। जत्थेदार ने न्याय की लड़ाई लड़ने की शक्ति देने की अरदास की जत्थेदार गरगज्ज ने खालसा पंथ को न्याय की लड़ाई लड़ने की शक्ति देने की अरदास की। साथ ही उन्होंने शहीदों के परिवारों और उनके बच्चों के कल्याण की भी कामना की। कार्यक्रम के दौरान दो महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। पहली घोषणा के तहत एसजीपीसी को खालसा पंथ के सहयोग से हरिके पट्टन में ‘शहीदी स्मारक’ स्थापित करने का निर्देश दिया गया। दूसरी घोषणा में कहा गया कि वर्ष 1982 से 1995 तक के सभी शहीदों और लावारिस घोषित किए गए मृतकों का विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जो श्री अकाल तख्त साहिब के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा होगा। समारोह में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित विभिन्न तख्तों के जत्थेदार, एसजीपीसी पदाधिकारी, धार्मिक नेता और बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया।



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