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सुजानपुर नगर कौंसिल में बिगड़ा आप का खेल:3 साल बाद अनुराधा बाली की कांग्रेस में वापसी, आम आदमी पार्टी ने नहीं दी थी टिकट, कांग्रेस का बन सकता है प्रधान




आप से नाराज होकर बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव जीते प्रत्याशियों ने सत्तासीन पार्टी का खेल बिगाड़ दिया है। आम आदमी पार्टी से टिकट ना मिलने के चलते पूर्व कौंसिल अध्यक्ष अनुराधा बाली और लक्ष्मी वर्मा बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरी थीं। जिन्होंने जीत हासिल की और 3 साल बाद सोमवार को कांग्रेसी विधायक नरेश पुरी की उपस्थिती में कांग्रेस की दामन थाम लिया। दोनों पार्षदों को मिलाकर नगर कौंसिल में कांग्रेस को बढ़त मिली है और अगर कांग्रेस किसी तरह एक अन्य निर्दलीय को कांग्रेस में शामिल कर ले प्रधान की कुर्सी पर अपने अध्यक्ष को बिठा सकती है। आप को अमित मंटू की अनदेखी पड़ी भारी
इस बार के नगर कौंसिल चुनाव में आम आदमी पार्टी ने हलका इंचार्ज ठाकुर अमित सिंह मंटू की बजाए राजपूत कल्याण बोर्ड के चेयरमैन स्वर्ण सिंह सलारिया के हाथ में नगर कौंसिल चुनाव लड़ने की कमान दी थी। इस दौरान अमित सिंह मंटू की ओर से रिकमेंड किए गए कई उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिली। जिन उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिली उनमें पूर्व कौंसिल अध्यक्ष अनुराधा बाली उनके पति महेंद्र बाली, लक्ष्मी वर्मा, सुरेंद्र वर्मा ने आजाद रूप में चुनाव लड़ा जिसमें अनुराधा बाली लक्ष्मी वर्मा तथा सुरेंद्र वर्मा चुनाव जीत गए। अगर आम आदमी पार्टी की ओर से इन तीनों को टिकट दिया गया होता तो आम आदमी पार्टी के इस बार साथ पार्षद होते। ऐसे में आम आदमी पार्टी बड़ी आसानी से अपना नगर कौंसिल अध्यक्ष बना सकती थी। 2023 में 8 पार्षदों सहित आप में गई थी अनुराधा बाली
मई 2023 में सुजानपुर की नगर कौंसिल प्रधान सहित आठ पार्षदों आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। तब कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने उन्हें पार्टी में शामिल करवाया और उनका अध्यक्ष पद भी बरकरार रहा। इससे पहले, वे मई 2026 के आसपास आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हुई नजर आई थीं और आप की जीत का जश्न मनाते हुए भी देखी गई थीं।
तीनों पार्टियों के थे 4-4 पार्षद
बता दें, 26 जून को हुए चुनाव में भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने अपने 15-15 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था जबकि 14 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। 29 जून को नतीजे आए तो भाजपा, आप और कांग्रेस पार्टी के 4-4 उम्मीदवार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे जबकि 3 आजाद उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। त्रिशंकू नतीजों के बाद तीनों पार्टियां अपना प्रधान बनाने का दावा करती रहीं। लेकिन, सोमवार को आजाद पार्षद अनुराधा बाली और लक्ष्मी वर्मा ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी में वापसी की। इनके साथ पूर्व पार्षद महिंदर बाली भी कांग्रेस में शामिल हो गए। सुजानपुर के कांग्रेस विधायक नरेश पुरी ने इन नेताओं का पार्टी में स्वागत करते हुए उनकी औपचारिक घर वापसी करवाई।
प्रधान पद के लिए चाहिए 8 वोट
सुजानपुर में भाजपा और आप के पास अब 4-4 पार्षद हैं। जबकि, कांग्रेस अब 6 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, कांग्रेस के पास विधायक नरेश पुरी के वोट की एक और बढ़त है। लेकिन, अध्यक्ष पद तक पहुंचने के लिए किसी भी पार्टी को 8 वोट चाहिए। ऐसे में कांग्रेस की नजर एक अन्य आजाद उम्मीदवार सुरिंदर कुमार पर है। इसके अलावा क्रॉस वोटिंग भी कांग्रेस की नैया पार लगा सकती है।
कल के चुनाव पर टिकी नजरें
बता दें, सोमवार को सुजानपुर नगर कौंसिल में प्रधान और उप-प्रधान पद का बहुप्रतीक्षित चुनाव होना था। जिसे ऐन वक्त पर प्रशासनिक कारणों के चलते अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। अब अधिकारियों ने मंगलवार दोपहर 2 बजे एक बार फिर चुनाव करवाने की बात कही है। जिस पर अब पूरे सुजानपुर की नजर टिकी है। 29 जून को ये थे चुनाव परिणाम



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