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सरकारी स्कूलों में RTE मानकों की जांच करेगा हाईकोर्ट:29 जुलाई तक मांगा स्कूलवार हलफनामा, दिसंबर तक 500 शिक्षकों की भर्ती का दावा




पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों के पालन को लेकर प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन को 29 जुलाई तक सभी सरकारी स्कूलों का स्कूलवार हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। करीब 14 वर्ष से लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि प्रत्येक सरकारी स्कूल में RTE अधिनियम की अनुसूची में तय मानकों का कितना पालन हो रहा है। जहां किसी प्रकार की कमी है, उसका स्पष्ट उल्लेख भी हलफनामे में किया जाए। शिक्षक रिक्तियों और सुविधाओं का ब्यौरा मांगा अदालत ने प्रशासन से सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों, बुनियादी सुविधाओं और जरूरी व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि हर स्कूल में आरटीई के नियमों का कितना पालन हो रहा है, इसकी सही और स्पष्ट स्थिति बताई जाए। सुनवाई के दौरान प्रशासन ने बताया कि वर्ष 2012 में शहर में 77 सरकारी स्कूल थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 111 हो गई है। प्रशासन के अनुसार वर्तमान में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात (PTR) 1:26 है, जबकि RTE के तहत 1:30 का मानक निर्धारित है। दिसंबर तक 500 शिक्षकों की भर्ती का दावा प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि 342 नियमित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भर्ती एजेंसी के चयन के लिए ई-टेंडर जारी किया जा चुका है और दिसंबर 2026 तक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके अलावा 160 पद डेपुटेशन के माध्यम से भरे जाएंगे। प्रशासन का दावा है कि वर्ष के अंत तक कुल 500 शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी। हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न अवसरों पर दाखिल हलफनामों में रिक्त पदों की संख्या अलग-अलग बताई गई है और वास्तविक स्थिति सामने नहीं लाई जा रही। इस पर कोर्ट ने सही और अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। स्टेट एडवाइजरी काउंसिल का रिकॉर्ड भी तलब हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से यह भी पूछा है कि शिक्षा संबंधी स्टेट एडवाइजरी काउंसिल की बैठकें कब-कब हुईं। बैठकों में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी हलफनामे में देने को कहा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 1991 में चंडीगढ़ की आबादी करीब 5 लाख थी और उस समय 50 सरकारी स्कूल थे। वर्तमान में आबादी बढ़कर लगभग 15 लाख हो चुकी है, जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या 111 है। जानकारी के अनुसार 1991 में गृह मंत्रालय ने 4515 शिक्षकीय पद स्वीकृत किए थे, जिनमें वर्तमान में करीब 2500 शिक्षक कार्यरत हैं। 1800 शिक्षकों की भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वर्ष 2005 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1375 अतिरिक्त पद सृजित किए गए थे, जिनमें से करीब 800 पद ही भरे गए हैं। 1.65 लाख विद्यार्थियों के लिए 5500 शिक्षक शिक्षा विभाग के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू होने के बाद अप्रैल 2022 से तीन वर्ष के बच्चों को भी स्कूलों में प्रवेश दिया जा रहा है। वर्तमान में विभाग के स्कूलों में 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के करीब 1.65 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके लिए लगभग 9000 शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में करीब 5500 शिक्षक ही कार्यरत हैं।



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